कमल कुमार
कैथल। सर्दी के मौसम में परंपरागत खेती के साथ-साथ मशरूम की खेती करके किसान अधिक आय कमा रहे है। जिला में 100 यूनिट में मशरूम की खेती करके किसान अन्य फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। गुहला व सीवन के क्षेत्र में किसान मशरूम की खेती के माध्यम से रोजाना 100 से 150 क्विंटल मशरूम को सब्जी मंडी में सप्लाई कर रहे हैं। इन दोनों क्षेत्रों के करीब 70 किसान 80 यूनिटों में मशरूम की खेती कर रहे हैं। मशरूम की खेती जैविक रूप से किए जाने के कारण यह स्वास्थ्य को ठीक रखने में काफी लाभदायक साबित होती है।
तीन प्रकार की होती है मशरूम की खेती : कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मशरूम की खेती तीन प्रकार से होती है। जो 12 महीने लगातार हो सकती है। पहला प्रकार बटन मशरूम है जो सर्दी के मौसम में उगाई जाती है। जिसके लिए 16 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान चाहिए। दूसरा प्रकार डिंगरी मशरूम है, जो सामान्य मौसम में होती है। जिसके लिए 20 से 27 डिग्री सेल्सियस का तापमान चाहिए। तीसरा प्रकार मिल्की मशरूम है जो गर्मियों के मौसम में उगाई जाती है। इसके लिए 28 से 38 डिग्री सेल्सियस का तापमान चाहिए। इस मशरूम की खेती के लिए खेतों का एयर कंडीसन होना जरूरी है।
इन गांवों के किसान करते है मशरूम की खेती : गुहला व सीवन क्षेत्र के गांव हरनौला, सीवन, खरकां, मलिकपुर, पहाड़पुर, खेड़ी गुलाम अली, सैर, कमहेड़ी, कांगथली सहित अन्य गांवों के लोग जैविक ढंग से मशरूम की खेती कर रहे हैं।
एक किसान की 70 किलो से एक क्विंटल तक लागत : मशरूम की खेती करने वाले गांव हरनौला के किसान कुलदीप चीमा ने बताया कि अन्य फसलों के साथ-साथ मशरूम की खेती से किसानों को काफी फायदा मिलता है। उसने बताया कि सर्दी के मौसम में मशरूम की खेती किसानों के लिए एक वरदान है। खेती से किसानों द्वारा लगाई गई पूंजी से डबल मुनाफा मिल जाता है जो अन्य सब्जियों के मुकाबले अधिक है।
फंगस की खेती है मशरूम की खेती : किसान लक्ष्मी आनंद ने बताया कि मशरूम फूंफद की खेती है। इसमें किसानों को अलग से खेत लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसे हम अपने प्लाट या फिर घर में आसानी से उगा सकते हैं। यह शुगर, ब्लड प्रेशर, एनिमिया व खून की कमी को भी कम करता है।
मशरूम की खेती से निहाल हो रहे हैं किसान
सर्दियों में बढ़ रहा है मशरूम का उत्पादन
जैविक तकनीक अपनाकर किसान अपना रहे हैं मशरुम की खेती
फोटो नंबर-16,17