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कुदरत तो ऐसा नहीं करती, एक गांव में लडक़े पैदा हों 27 और लड़कियां पैदा हों 12

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‘कुदरत तो ऐसा नहीं करती, एक गांव में लड़के पैदा हों 27 और लड़कियां पैदा हों 12’
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अगस्त माह में लिंगानुपात 879 से गिरकर 824 पहुंचने पर डीसी सुनीता वर्मा ने बुधवार को आशा वर्कर्स की बैठक बुलाकर जमकर खिंचाई की। डीसी ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिए कि तीन माह में खराब लिंगानुपात वाले गांवों में हालात में सुधार नहीं आया तो उन आशा वर्कर्स को नौकरी करने का कोई लाभ नहीं, उन्हें नौकरी से हटा दिया जाएगा। वे कन्या भ्रूण हत्या पर विभाग को सूचित ही नहीं करती तो फिर उनके काम करने का क्या फायदा? लघु सचिवालय स्थित सभागार में डीसी ने गुहला, कलायत व राजौंद ब्लॉक के उन गांवों की आशा वर्कर्स की बैठक ली, जिनमें लिंगानुपात लगातार कम होता जा रहा है। इन गांवों से करीब 150 आशा वर्कर्स पहुंची थीं। जिसमें सर्वाधिक 50 गांव ऐसे थे, जहां लिंगानुपात काफी कम हो रहा है।
बैठक में कई गांवों में लिंगानुपात डाउन होने पर डीसी ने कहा कि अगस्त माह में लिंगानुपात गिरकर 824 आ गया है। जो बड़े शर्म की बात है। प्रदेश में कैथल पिछड़े तीन जिलों में शुमार है। आप महिला होकर महिलाओं की सुरक्षा क्यों नहीं कर सकतीं। लिंगानुपात को देखकर जाहिर है कि जिले में धड़ल्ले से कन्या भ्रूण हत्या हो रही है। क्योंकि कुदरत तो ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकती कि एक समय में एक गांव में 27 बेटे पैदा हों और बेटियां केवल 12। डीसी ने अरनौली में 550, बदसूई में 625, भाटिया में 400, बौपुर, चाबा में, लंडाहेड़ी में 333, सरौला में 250, रसूलपुर में 389, सौथा में 444, कांगथली में 772, प्रभोत में 167 के लिंगानुपात पर आशा वर्कर्स से एक-एक करके कारण पूछा और सुधार के निर्देश दिए।
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महिला होकर महिला की सुरक्षा नहीं कर सकती : डीसी ने कहा कि शर्म आ रही है कि हमारे जिले में बेटियों का कत्ल होता है। आप महिला होकर महिला की सुरक्षा नहीं कर सकती। सोचिए यदि आपको और हमें हमारे माता-पिता लड़की होने के चलते गर्भ में मरवा देते तो आज हम यहां नहीं होते। यह ऐसी समस्या है, जो आज आपको समझ नहीं आ रही। यदि बेटियां ऐसे ही कम होती रही तो आने वाले पूरे समाज को यह समस्या के लिए खतरनाक बन जाएगी।

को-ओर्डिनेटर की एक दिन की सैलरी काटने के आदेश : कई ऐसे गांव थे, जहां का लिंगानुपात 400 या 500 के आस-पास था। इन गांवों से आशा वर्कर्स मीटिंग में ही नहीं पहुंची तो डीसी ने आशा ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर का एक दिन का वेतन काटने के आदेश जारी कर दिए। डीसी ने कहा कि इस समस्या को हल्के में न लें।

गर्भवती महिलाओं की लिस्ट बनाएं : डीसीने आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में गांव की गर्भवती महिलाओं की लिस्ट बनाकर विभाग को दें। ऐसी गर्भवती महिलाओं का प्रसव होने तक ट्रैकिंग करें। उन्होंने कहा कि गर्भ में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकारी सेवा के साथ-साथ सामाजिक सेवा समझकर अपनी ड्यूटी करें।

जिले में केवल 13 स्थानों पर हो सकता है गर्भपात, कहीं ओर हो रहा है तो बताएं : डीसी ने कहा कि जिले में 13 स्थानों पर गर्भपात हो रहा है। यदि कहीं और जाकर कोई गर्भपात करवा रही है तो इसकी सूचना दें।

गुप्त सूचना के लिए स्कूल, कॉलेजों व पीएचसी, सीएचसी में लगाए बॉक्स : जो आशा वर्कर सामने नहीं आ चाहती या फिर कोई अन्य व्यक्ति गर्भपात संबंधी सूचना देकर सामने नहीं आना चाहता वह अपनी शिकायत लिखकर ड्रॉप बॉक्स में डाल सकता है। इसके लिए कन्या स्कूलों, महिला कॉलेजों व सभी कोर्ट, लघु सचिवालय, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्योडक़, पाड़ला, टीक, किठाना, करोड़ा, जाखौली, राजौंद, ढांड, रसीना, कौल, कांगथली, खरकां, भागल, बालू, बात्ता, देवबन, कलायत, पूंडरी, पाई, हाबड़ी, मुंदड़ी, शक्ति नगर, पटेल नगर तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीवन व कौल में भी बाक्स लगाए गए हैं। स्कूलों में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैथल, सीवन, जाखौली अड्डा, आईटीआई कैथल तथा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलायत, गुहला, राजौंद में शिकायत बॉक्स लगाए गए हैं। आरकेएसडी कालेज, आईजी कालेज, जाट कालेज, डा. भीम राव अंबेडकर कालेज, हिंदू कन्या कालेज, एचसीटीएम कैथल, रामा कॉलेज कुतुबपुर, बीएआर जनता कालेज कौल, ईश्वर सिंह कन्या विद्यालय, डीएवी कालेज चीका तथा कन्या विद्यालय ढांड भी ड्रॉप बाक्स लगाए गए हैं।
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12 सप्ताह की गर्भवती महिला पर नजर रखें
सिविल सर्जन डा. अशोक कुमार ने बताया कि लिंगानुपात में पिछड़े गांवों पर फॉक्स किया जाएगा तथा लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि 12 सप्ताह के बाद लिंग निर्धारण की पहचान होने के बाद ही लिंग पहचान के लिए टेस्ट करवाए जाते हैं। इस समय में ज्यादा सतर्कता की जरूरत है। उप सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ ने कहा कि सभी आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं से लगातार संपर्क रखें तथा टीम वर्क के साथ इस दिशा में सुधार के लिए प्रयास करें।

- आशा वर्कर्स की बैठक में डीसी ने ली आशाओं वर्कर्स की क्लास, कहा- जाहिर है, गर्भ में हो रहा बेटियों का कत्ल
-तीन माह सुधार नहीं हुआ तो आशाओं को नौकरी पर रहने का कोई लाभ नहीं

फोटो संख्या-14 से 16
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