संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक दिसंबर शुक्रवार को राष्ट्रीय एड्स दिवस मनाया जाएगा। एड्स दिवस मनाने का उद्देश्य इससे बचाव और संक्रमित हुए मरीजाें का बेहतर इलाज करना है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में आठ महीने में 196 एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिले हैं।
दरअसल, एचआईवी एड्स की बीमारी से केवल जागरूकता और नियमित रूप से दवा खाने से ही बचा जा सकता है परंतु जिले में लगातार एचआईवी एड्स की बीमारी की जांच के तेज होने के बाद मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा है।
एड्स-एचआईवी मरीजों के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कैथल जिले का तीसरा स्थान है। पहले नंबर पर फरीदाबाद और दूसरे पर जींद जिला है। गौरतलब है कि जिले में 2017 से अब तक 2800 एड्स, एचआईवी मरीज मिल चुके हैं। वहीं, 90 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इनमें से 2450 एक्टिव एचआईवी मरीज बताए जाते हैं, जिनका नागरिक अस्पताल में बनाए गए एआरटी केंद्र में इलाज चल रहा है। एआरटी केंद्र में आने वाली मरीजाें का इतिहास में अभी तक पाया गया है कि तीन प्रकार की तरीकों से एचआईवी वायरस एड्स की बीमारी फैल रहे हैं।
इसमें पहला तरीका संक्रमित मरीज से दूसरे व्यक्ति के इसकी चपेट में आना, दूसरा लगातार बढ़ रही नशे करना के सीरिंज का प्रयोग व तीसरा माता से शिशु के बीच संक्रमण फैलना है। मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार स्क्रीनिंग करता है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस समय फरीदाबाद में सबसे अधिक तीन हजार, जींद में 2950 एचआइवी मरीज हैं, वहीं कैथल में सक्रिय मरीजों की संख्या 2450 है। इनका जिला नागरिक अस्पताल से इलाज चल रहा है। इनमें सबसे ज्यादा 30 से 40 वर्ष के हैं। 18 साल से कम आयु के भी हैं। छह बच्चे पांच साल से कम हैं। कलायत, पूंडरी, चीका और सीवन क्षेत्र में एचआईवी एड्स लगातार बढ़ा है।
जिला नागरिक अस्पताल के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन मांडले ने बताया कि एचआईवी एड्स की बीमारी से बचाव के लिए एआरटी केंद्र बनाया गया है। यहां पहुंचकर कोई भी व्यक्ति बीमारी का इलाज करवा सकता है। इससे बचाव के लिए विभाग लगातार लोगों को जागरूक भी करता है।
एड्स और एचआईवी में क्या अंतर
एचआईवी और एड्स में क्या अंतर है? क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक एचआईवी और एड्स में सबसे अहम अंतर यह है कि एचआईवी एक वायरस है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। वहीं, एड्स एक ऐसी स्थिति या बीमारी है, जो एचआईवी संक्रमण की वजह बन सकती है, जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है।