21 दिसंबर को होना है जिले में मॉक ड्रिल, लघु सचिवालय में ही बेहाल हैं फायर फाइटिंग सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। पूरे प्रदेश में आगामी 21 दिसंबर को आपदा प्रबंधन विभाग के संयोजन में जिलास्तर पर सभी विभागों की मदद से मॉक ड्रिल का आयोजन कर आपदा के समय की तैयारियों की जांच की जानी है। लेकिन कैथल में लघु सचिवालय में ही आपात स्थिति में आवश्यक उपायों का अभाव है। तीन मंजिला पूरे भवन नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। अमर उजाला में गत जून माह में भी यह मामला उठाया गया था। इसके बाद कागजों में मंजूरी आदि लेने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन अग्निशमन यंत्रों, सायरन या फिर एनबीसी के अनुसार यहां आवश्यक उपाय नहीं किए जा सके हैं।
अग्निशमन यंत्रों में शून्य से भी नीचे है गैस की सूई, पाउडर का पता नहीं : विशेषज्ञों ने बताया कि अग्निशमन यंत्र में गैस के अलावा एक पाउडर भी होता है। गैस इस पाउडर की स्पीड बनाती है, जिससे आग बुझ जाती है। लेकिन लघु सचिवालय में जो अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं, उनमें अधिकतर में गैस की सूई शून्य पर है। इसके अलावा पाउडर की क्या स्थिति है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। स्वयं डीसी कार्यालय के बाहर लगे सिलेंडर में सूई शून्य से भी नीचे है। यही स्थिति इस भवन में लगे दूसरे सिलेंडरों व फायर फाइटिंग सिस्टम की है। इन पर वर्ष 2011 की तिथि अंकित है। अब कब इन्हें बदला जाना था या फिर कब तक गैस रहती है। यह सब भगवान भरोसे है।
आपात सायरन सिस्टम अपडेट नहीं : आपात स्थिति में बजने वाला अलार्म सिस्टम यहां अपडेट नहीं हैं। अलार्म से ही आपात स्थिति की सूचना दी जाती है। लेकिन यह पूरा सायरन सिस्टम किस हालत में हैं, इस बारे में खुद प्रशासनिक अधिकारियों को पता नहीं है। दमकल विभाग ने इस सिस्टम की उस एजेंसी से जांच करवाए जाने की सिफारिश की है, जिसने सालों पहले इस सिस्टम को लगाया होगा।
रिसर्च में ये निकली हैं बड़ी खामियां :
1. वेट राइजर पाइप नहीं है
2. पूरे भवन मेें नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार उपाय नहीं किए गए हैं।
3. अग्निशमन यंत्रों की गैस व पाउडर की स्थिति जांची जाए।
4. अलार्म सिस्टम का पता नहीं चल रहा है या नहीं।
5. होज रील नहीं है। इसमें आग बुझाने में यह पाइपनुमा उपकरण है। जिससे आग बुझाने में मदद मिलती है।
6. 50 हजार लीटर का अंडरग्राउंड वाटर टैंक होना चाहिए, जो नहीं है।
7. वाटर पंप की आवश्यकता है।
पहले भी उठाया था मामला : अमर उजाला ने जून माह में भी यह मामला उठाया था। इसके बाद कागजी कार्रवाई शुरू हुई। जिसमें इन अग्निशमन यंत्रों में गैस भरवाए जाने, अलार्म सिस्टम की जांच किए जाने सहित कई तरह के उपायों के लिए प्रशासन के सामने नोटिंग पुट-अप की गई है। लेकिन अभी यह तैयारी जमीन पर नहीं उतर पाई है। अभी तक पूरे भवन में आगजनी से निपटने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए हैं। जिस कारण यदि कभी कोई हादसा हुआ तो जान-माल का नुकसान ज्यादा हो सकता है।
21 दिसंबर को की जानी है मॉक ड्रिल : आगामी 21 दिसंबर को प्रदेश स्तर पर सभी जिलों में मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाना है। जिसमें पूरा प्रशासन शामिल रहेगा। साथ ही निजी व सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। पूरे जिले में आपदा के समय में प्रयोग होने वाले उपकरणों, संसाधनों, भवनों को शामिल किया जाएगा।
यह बात संज्ञान में आई है कि लघु सचिवालय में फायर संबंधी कुछ खामियां हैं। उन्हें दूर करवा दिया जाएगा। यह इसी प्लानिंग का हिस्सा है। प्रयास किया जा रहा है कि लघु सचिवालय सहित पूरे जिले में आपात स्थिति में प्रशासन सभी संसाधनों व आम जन के सहयोग से नुकसान को अधिक से अधिक कम कर सके। 21 दिसंबर की मॉक ड्रिल में भी इन सब बातों का ध्यान रखा जाएगा। उस दौरान जो खामियां रहेंगी, उन खामियों की पूरी रिपोर्ट तैयार करके उसे दूर किया जाएगा। कर्मचारियों व अधिकारियों को मॉक ड्रिल के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सुनीता वर्मा, डीसी, कैथल।
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अमर उजाला द्वारा पहले भी उठाया गया था मामला
फोटो संख्या-9 से 12