स्वच्छता सर्वेक्षण: अधिकारी करते रहे तैयारियां, सर्वेक्षण टीम शहर में 250 लोगों से सवाल पूछकर निकलीं
पिछली बार के सर्वेक्षण में डाउन हुई थी शहर की स्वच्छता रैंकिंग, इस बार नगर परिषद ने की थी खूब तैयारी
लेकिन औचक निरीक्षण से निकल कर आएगी असली तस्वीर
शहर में अभी भी कई जगह अव्यवस्था, डस्टबीन से बाहर पड़ी रहती है गंदगी
करनाल रोड पर लीकेज नाले की आज तक नहीं ली जा रही सुध
फोटो नंबर-39
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। केंद्र सरकार की सर्वेक्षण टीम का नगर परिषद के अधिकारी लगभग पूरे माह से इंतजार करते रह गए। लेकिन दो दिन पूर्व टीम चुपचाप शहर में सर्वेक्षण करके निकल गई। टीम ने शहर में 250 लोगों से सवाल पूछे और रिपोर्ट बनाकर चली गई। बाद में अधिकारियों को पता चला। पिछले साल शहर की स्वच्छता रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई थी। इस बार टीम को क्या मिला, यह तो रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अधिकारियों की तैयारियां धरीं की धरीं रह गईं।
केंद्र सरकार के स्वच्छता मिशन के तहत पूरे देश में स्वच्छता सर्वेक्षण जारी है। इसी कड़ी में सर्वेक्षण की तैयारियां भी पूरे शहर में जोरों से चली। नप के अधिकारियों की ओर से अव्वल रैंकिंग के लिए भी शहर में सफाई व्यवस्था पर अधिक जोर दिया गया। इस दौरान नप के अधिकारी पिछले एक महीने से स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के आने का इंतजार करते रहे। लेकिन सर्वेक्षण टीम के सदस्य शनिवार को अधिकारियों को बिना बताए ही पूरे शहर की स्वच्छता को लेकर सर्वेक्षण कर गए।
स्वच्छता सर्वेक्षण टीम ने लोगों से शौचालय, डस्टबिन संबधित पूछे छह सवाल : 25 जनवरी को दोपहर बाद आई टीम टीम ने दो दिवसीय दौरे में सर्वेक्षण के दौरान केवल चार सार्वजनिक जगहों पर जाकर 250 लोगों से सफाई, शौचालय, डस्टबिन संबधित सहित कुल छह सवाल ही पूछे। जिसमें सबसे अधिक जोर सार्वजनिक शौचालयों के सवाल पर रहा। इस दौरान टीम ने 250 लोगों से बाजार व सार्वजनिक स्थान कूड़ा डालने के लिए डस्टबिन, सार्वजनिक शौचालय, डोर टू डोर अभियान के तहत कचरा उठान, सूखे व गीले कचरे की प्रक्रिया व नप की ओर से लोगों को सुविधा के लिए दिए जाने वाले मोबाइल टॉयलेट के कुल छह सवाल पूछे। टीम जाते-जाते कार्यालय से ली जाने वाली जानकारी लेकर गई, तब जाकर अधिकारियों को टीम के आने का पता चला।
शहर में कूड़ा उठान की है समस्या : शहर में नप की ओर से मुख्य मार्गों पर सफाई तो जरूर करवाई जाती है। लेकिन मुख्य चौक पर कूड़ा उठान की समस्या काफी गंभीर है। कई जगह डस्टबीन से बाहर कचरा पड़ा रहता है। जो कई-कई दिन तक नहीं उठाया जाता।
करनाल रोड पर लीक हुए नाले की जिम्मेवारी लेने को ही कोई अधिकारी तैयार नहीं हैं। नगर परिषद का कहना है कि यह नाला जनस्वास्थ्य विभाग का है। जनस्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह नाला नगर परिषद का है। जबकि इस लीक हुए नाले के कारण सड़क पर पानी फैलना शुरू हो गया है।
शुरू की रात में सफाई की सेवा, लेकिन रगुलेर केवल 150 सफाई कर्मचारी तैनात : हाल ही में नप की ओर से 6.50 लाख रुपये का टेंडर जारी करने के बाद वर्क आर्डर देकर रात में सफाई करने की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन टीम द्वारा अधिकारियों को बिना बताए ही सर्वेक्षण करके चले जाना कहीं न कहीं अधिकारियों की चिंता का विषय है। दूसरा नप में वर्तमान में केवल 150 सफाई कर्मचारी ही नियमित हैं। कुछ महीने पहले अनुबंध पर तैनात 100 से अधिक सफाई कर्मचारी सरकार ने हटा दिए थे।
पिछले वर्ष गिरी थी रैंक, प्रदेश में मिला था 9वां नंबर : स्वच्छता सर्वेक्षण में वर्ष 2018 में शहर ने प्रदेश में नौंवे नंबर पर रही थी। लेकिन देशभर की रैंकिंग में शहर 292 से 309वें पर आया था। ऐसे में रैंकिंग गिरने के कारण इस बार अधिकारियों द्वारा रैंकिग में अच्छा रहने प्रयास किया जा रहा था।
सर्वेक्षण करने के बाद मिली जानकारी : नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक मोहन भारद्वाज ने बताया कि टीम ने नप के अधिकारियों को बिना बताए ही सर्वेक्षण किया है। जब टीम शहर में पूरा सर्वेक्षण करके गई। उसके बाद ही हमें इसकी जानकारी मिली। इस बार टीम की शर्त नप अधिकारियों के नहीं लेकर जाने की रही। जिस कारण हमें इसका पता नहीं चल पाया। लेकिन हमारी तैयारियां पूरी हैं। पूरे शहर में काफी काम किया गया है। इस बार निश्चित तौर पर शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार आएगा।