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जब आप कपड़े, मोबाइल या जूते के लिए रूठ सकते हो तो क्या अपने पापा या भाई को हेलमेट पहनने के लिए नहीं रूठ सकते?

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बच्चों का किया आह्वान, खुद भी करें यातायात नियमों का पालन, अन्य को भी करें जागरूक
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- अमर उजाला पुलिस पाठशाला में एसएचओ रमेश चंद ने सैनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों को बताए यातायात के नियम
फोटो संख्या-4, 18 व 19
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जब आप अपने माता-पिता से अपने के लिए कपड़े, जूते या कोई अन्य वस्तु की मांग करते हुए रूठ जाते हैं। खाना नहीं खाते। मजबूरन माता-पिता आपको वह वस्तु दिलवा देते हैं। तो आप अपने पिता या भाई के लिए क्यों नहीं रूठ सकते, जो बाइक पर बिना हेलमेट या कार को बिना सीट बेल्ट लगाए चलाते हैं। उनसे कहिए कि जब तक आप हेलमेट नहीं पहनेंगे, सीट बेल्ट नहीं लगाएंगे। तब तक खाना नहीं खाऊंगा या खाऊंगी। ट्रैफिक थाना प्रभारी रमेश चंद ने सैनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जब नौंवी से बारहवीं तक के बच्चों से यह भावुक अपील की तो कई बच्चों की आंखें छलक आईं। मौका था अमर उजाला द्वारा स्कूल में पुलिस पाठशाला का। जिसमें एसएचओ बच्चों को यातायात के नियमों की जानकारी देने पहुंचे थे।
एसएचओ ने उदाहरण देकर बच्चों को करीब एक घंटे तक यातायात नियमों की महत्ता बताई और कहा कि यातायात के नियमों का पालन न करने के कारण देश को जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है।
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ये बातें बताई एसएचओ ने
1. भारत में हर साल एक लाख 50 हजार लोग हादसों में मारे जाते हैं। जिसमें करीब-करीब एक शहर की आबादी खत्म हो जाती है। 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति खराब होती है। जिससे एक शहर बसाया जा सकता है। 1400 करोड़ रुपया इलाज पर खर्च होता है। यह सब लापरवाही के कारण होता है।
2. हादसों में 70 से 80 प्रतिशत बाइक सवार मरते हैं। इसमें भी 90 प्रतिशत सिर की चोट के कारण मरते हैं। जिसका मुख्य कारण हेलमेट का न पहनना है। यदि बाइक सवार का हेलमेट पहने हुए हादसा हो जाता है तो उसे सिर की चोट नहीं लगती। उसे होश रहता है। घायल होने पर भी वह अपने बारे में पूरी जानकारी बता देता है और परिजनों को समय पर सूचना मिलने पर उसे अच्छा इलाज मिल जाता है।
3. बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर हादसे में जान-माल का क्लेम उसी वाहन चालक को वहन करना पड़ता है। जिसका लाइसेंस नहीं होता। चाहे उसकी गलती है या नहीं। 16 से 18 साल तक के बच्चे बाइक या स्कूटी नहीं चला सकते। वे केवल मोपेड या वह बिना गियर का वाहन जिसका इंजन 60 सीसी तक है, वे ही चला सकते हैं। हादसे की सूरत में उनके माता-पिता पर जुर्माना या सजा दोनों हो सकते हैं।
4. वाहनों का बीमा केवल चालान कटने से बचने के लिए न करवाएं, बल्कि अपने नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए करवाएं। चोरी या हादसे की सूरत में बीमा न होने पर सारा खर्च खुद उठाना पड़ता है।
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5. सड़क पर गलत दिशा में न चलें, गलत जगह वाहन पार्किंग न करें। कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करें। घायलों की मदद करें। परिजनों को जागरूक करें कि शराब पीकर वाहन न चलाएं। ट्रिपल राइडिंग से बचें।
स्कूल प्रबंधक कमेटी प्रधान राजेश कुमार, मैनेजर मांगे राम, महासचिव अमित सैनी, स्कूल प्रिंसिपल संजीव मित्तल ने एसएचओ रमेश चंद्र का आभार व्यक्त किया।
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