भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भाई दूज पर्व आज
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भाई दूज का पावन पर्व आज मनाया जाएगा। इस पर्व में बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई दूज या भैया दूज का यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है। गायत्री ज्योतिष अनुसन्धान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया की भाई दूज को भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपराह्न यानी दिन के चौथे भाग में भाई दूज मनाई जानी चाहिए। माना जाता है कि अगर अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि लग जाए तो उस दिन भाई दूज नहीं मनानी चाहिए। मान्यता के अनुसार ऐसे में भाईदूज अगले दिन मनानी चाहिए। हां अगर ऐसा हो जाए कि अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि नहीं लगे तो भाई दूज या भैया दूज अगले दिन मनाई जाती है। कुछ लोग कार्तिक शुक्ल पक्ष में मध्याह्न यानी दिन के तीसरे भाग में प्रतिपदा तिथि शुरू होने पर भाईदूज मनाते हैं।
भाई दूज या भैया दूज के शुभ मूहर्त दोपहर 1:10 बजे से शाम 3:27 बजे तक है। शुभ मुहूर्त की अवधि- 2 घंटे 17 मिनट रहेगी।