अब अनाज मंडी चीका के होंगे तीन तीन प्रधान
सर्वसम्मति के सवाल पर हुई खींचतान, तीन गुटों में बंटी मंडी एसोसिएशन
एक गुट चाहता था सर्वसम्मति, पूर्व प्रधान की चुनाव लड़ने की जिद ने बिगाड़ा खेल
गेहूं के सीजन में ही दिखने लगेंगे गुटबाजी के साइड इफेक्ट्स
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। चीका की अनाज मंडी एसोसिएशन अब तीन गुटों में बंट गई है। हालांकि आढ़तियों के एक गुट द्वारा कोशिशें इस बार सर्वसम्मति को लेकर शुरू हुई थी, लेकिन पूर्व प्रधान जयपाल गर्ग द्वारा हर हाल में चुनाव लड़ ने की घोषणा के चलते दोनों पक्षों में तनाव इतना बढ़ गया कि आज अनाज मंडी तीन गुटों में बंट गई। निवर्तमान प्रधान जयपाल गर्ग ने एसोसिएशन चुनाव के लिए बनी कमेटी के सामने अपना पर्चा दाखिल कर दिया है वहीं मंडी के दो अन्य गुटों ने शनिवार को बाकायदा अपने-अपने प्रधान घोषित कर दिए हैं। जयपाल गर्ग चूंकि चुनाव कमेटी के समक्ष पर्चा दाखिल करने वाले अकेले प्रत्याशी हैं, इसलिए उनका भी प्रधान बनना तय है। अपने-अपने प्रधान घोषित करने वाले दोनों गुटों ने चुनाव कमेटी के अस्तित्व को ही अवैध बताकर अपने अपने प्रधानों को असली प्रधान बताया है।
गौरतलब है कि अनाज मंडी एसोसिएशन का चुनाव 21 मार्च को होना घोषित हुआ था। आढ़तियों का एक बहुसंख्यक दल इस बार चुनाव ना करवाकर सर्वसम्मति से कार्यकारिणी नियुक्त करने के लिए अभियान चला रहा था। इस गुट का तर्क था कि चुनाव के दौरान होने वाली तनातनी के चलते पूरा साल मंडी में आपसी फूट का माहौल रहता है जिस कारण सीजन में अधिकारी अपनी मनमर्जी चला जाते हैं और आढ़ती आपसी एकता ना होने के कारण विरोध भी ढंग से नहीं कर पाते। शुक्रवार को इस गुट ने अग्रवाल धर्मशाला में एक मीटिंग भी बुलाई थी जिसमें चुनाव करवाने पर अड़े गुट के आढ़तियों के साथ इनकी हाथापाई की नौबत भी आ गई थी।
ज्ञान गोयल और सुरेश प्रजापति बने प्रधान : अनाज मंडी एसोसिएशन की चुनाव समिति के समक्ष आज पूर्व प्रधान जयपाल गर्ग द्वारा नामांकन दाखिल करने की खबर ज्यों ही पहुंची तो अनाज मंडी के सर्वसम्मति चाहने वाले गुट ने आनन फानन में मीटिंग बुलाकर जयभगवान गोयल को अपना प्रधान चुन लिया। कार्यकारिणी के गठन का अधिकार भी नवनियुक्त प्रधान को दे दिया गया।
उधर, नई अतिरिक्त अनाज मंडी के आढ़तियों ने भी अपने आपको मेन मंडी से अलग करते हुए नई एसोसिएशन बनाने की घोषणा कर दी। नई मंडी के आढ़तियों सुरेश प्रजापति को अपना प्रधान घोषित किया है। चुनाव समिति के सूत्रों ने बताया कि चूंकि जयपाल गर्ग नामांकन दाखिल करने वाले अकेले प्रत्याशी हैं इसलिए तकनीकी तौर पर तो वे प्रधान बन गए हैं लेकिन वैधानिक तौर पर उनके प्रधान बनने की घोषणा 21 मार्च को की जाएगी।
पक्का आढ़ती बनने के समय दिखेंगे साइड इफेक्ट : जिन हालातों में अनाज मंडी में फूट पड़ी है उसके साइड इफेक्ट बड़ी जल्दी नजर आने लगेंगे। आने वाले गेहूं के सीजन के दौरान होने वाले पक्के आढ़ती के ठेके को लेकर तीनों गुटों में जूतम पैजार हो सकती है। हालांकि मंडी के आढ़तियों का सबसे बड़ा गुट ज्ञान गोयल का बताया जा रहा है और उम्मीद है कि पक्का आढ़ती का ठेका लेने में भी ज्ञान गुट ही कामयाब होगा। परंतु यदि बोली हुई तो गुटबाजी में उलझे अन्य दोनों गुट पक्का आढ़ती का ठेका लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
सुविधा की शर्त पर मिलेगा समर्थन : मंडी आढ़ती ऐसोसिएशन के बीच पैदा हुई गुटबाजी के चलते अब आम आढ़ती भी सामने आ गए हैं और यह कहने लगे हैं कि उन्हें न तो किसी गुटबाजी से मतलब है और न ही ऐसोसिएशन से। वे तो उस गुट को अपना समर्थन देंगे जो गुट गेहूं के सीजन के दौरान उन्हें ज्यादा सहूलियत देगा। आढ़तियों का कहना था कि पिछले कुछ सालों से बनने वाली एसोसिएशन में उन्हें तवज्जो नहीं दी जा रही थी और उन्हें सरकार द्वारा गेहूं भरने के लिए दिया जाने वाला बारदाना भी लाइनों में लगकर गोदामों से लेकर आना पड़ता था, जबकि एजेंसी द्वारा बारदाना आढ़ती की दुकान पर भेजना होता है। आमतौर पर सामान्य रहने वाले आढ़तियों द्वारा चुप्पी तोड़ने से अब यह भी साफ हो गया है कि उनका जिस भी गुट को समर्थन मिला तो वह सुविधा की शर्त पर ही मिलेगा।