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Kaithal News: लाडवा में सैन महाराज जयंती समारोह के लिए गईं 18 बसें

Fri, 05 Dec 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल/गुहला चीका। कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा में आयोजित राज्य स्तरीय सैन महाराज जयंती समारोह के लिए कैथल से 18 बसें रवाना की गईं। इन बसों में शहर व गांवों के विभिन्न स्टॉपिज़ से यात्रियों को बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया गया। जबकि विभाग से कुल 22 बसों की मांग की गई थी।

रूटों पर यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज विभाग ने अतिरिक्त फेरे बढ़ाए। जींद, कुरुक्षेत्र, असंध और करनाल रूट पर पांच-पांच अतिरिक्त चक्कर लगवाए गए। दो दिन पहले ही मुख्यालय से बसें भेजने के आदेश प्राप्त हुए थे, जिसके बाद विभाग ने बसों को तैयार कर चालक-परिचालकों की ड्यूटी लगा दी थी। बुधवार शाम सभी बसों को निर्धारित स्टॉपिज़ पर भेज दिया गया। इस दौरान लीज व रोडवेज की कुल 185 बसें नियमित रूट पर चलाई गईं।
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इधर यात्रियों सुरेंद्र, मनजीत, राजकुमार और रणधीर ने कहा कि रैलियों में सरकारी बसों का दुरुपयोग हो रहा है। इससे आम जनता को रूटों पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना था कि सरकारी कार्यक्रमों के लिए निजी वाहनों का उपयोग होना चाहिए, क्योंकि रोडवेज में पहले ही बसों की कमी है और इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ता है।

यहां से रवाना हुई बसें ः कैथल के कमेटी चौक, सजूमा, सैन धर्मशाला कैथल, पाडला-गुहणा, फतेहपुर, संगरौली, ढांड, पूंडरी, भागल, दो चीका, खरौदी, सीवन, सिणद, देवबन, जाखौली, फतेहपुर और कलायत से बसें रवाना हुईं। प्रति बस में औसतन 40–45 यात्री सवार थे।

वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि लाडवा में राज्यस्तरीय कार्यक्रम के लिए कुल 18 बसें भेजी गईं। रूटों पर किसी यात्री को परेशानी न हो, इसके लिए बस अड्डे पर कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई। साथ ही कुल 185 बसें नियमित रूप से रूट पर चलाई गईं।
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उधर, गुहला चीका में संत शिरोमणि सेन भगत की जयंती सेन मंदिर चीका में धूम धाम मनाई गई। कार्यक्रम में झंडे की रस्म एनआरआई राजकुमार सेन भागल वाले ने निभाई। सेन कमेटी के प्रेस प्रवक्ता गुरबख्श पासी ने बताया कि राजगुरु बाबा सेन भगत ने सती प्रथा, छुआछूत व समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जोरदार मुहिम चलाई थी। बाबा ने सभी को समरसता का संदेश दिया। बाबा सेन भगत एक दूसरे से किए जाने वाले भेदभाव को गलत मानते थे।
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