अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नए साल 2018 की पहली सुबह जिला घने कोहरे की चादर से ढंका रहा। कड़ाके की ठंड में लोगों की सुबह हुई। दिन भर धूप नहीं निकली। अधिकतर तापमान में आई 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट ने ठंड को बढ़ा दिया है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि तापमान और नीचे जा सकता है।
रविवार शाम को ही कोहरा छा गया था। रात भर घना कोहरा छाया रहा। नए साल के जश्न को हालांकि मौसम ने काफी रोमांचक बना दिया। लोगों को ठंडे मौसम के लिए पहाड़ों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसके बाद सुबह भी दृश्यता ना के बराबर रही। मुश्किल से 3 से 5 मीटर तक ही दृश्यता रही। जिससे वाहन चालक काफी परेशान रहे। कौल स्थित तापमापी केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस था। जो सोमवार को गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। हालांकि न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज किया गया है। न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री दर्ज किया गया है।
कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे है। दुकानदारों द्वारा ठंड से बचाव को लेकर सुबह व शाम को अलाव जलाई जा रही है।
मौसम विभाग में कार्यरत कर्मचारी बलबीर सिंह ने बताया कि सोमवार इस बार की सर्दी का सबसे अधिक ठंडा दिन रहा। अधिकतम तापमान में गिरावट होने के कारण ठंड बढ़ी है। सोमवार को अधिकतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान 8.3 सेल्सियस डिग्री रहा।
सब्जियों में मटर, गोभी व आलू पर असर : घने कोहरे व ठंड के कारण मटर, गोभी, आलू, धनिया की फसल पर असर हो सकता है। किसान कुलदीप ने बताया कि इतनी ज्यादा ठंड में इन फसलों में नुकसान होता है। किसानों को चाहिए कि वे फसल को पाले से बचाने के लिए सिंचाई करते रहें।
गेहूं की फसल में इस मौसम का लाभ है। गेहूं को इस मौसम में फलने-फूलने का अवसर मिलता है। गेहूं के लिए ऐसा मौसम कई दिन रहे तो लाभदायक रहता है।
शाम को चली ठंडी हवाओं ने बढ़ाई मुश्किलें- पिछले तीन दिन पड़ रहे घने कोहरे के कारण जहां लोगों को घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। सोमवार शाम करीब सात बजे घने कोहरे के बाद ठंडी हवा चलने से जहां कोहरा कम हो गया। वहीं ठंडी हवा के कारण तापमान में ओर अधिक गिरावट आने लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा।
कोहरे के कारण दूध का कैंटर तालाब में उतरा, हादसा टला
राजौंद। नगर के कैथल मार्ग पर रात के समय घने कोहरे के कारण दूध का कैंटर गोगा माड़ी के साथ लगते तालाब में उतर गया। जिससे चालक ने कूदकर बड़ी मुश्किल से जान बचाई। चालक गरतेज सिंह ने बताया कि वह संगरूर सेे दूध का कैंटर लेकर मुरथल के लिए जा रहा था कि रात घने कोहरे के कारण उसे कुछ दिखाई नहीं दिया जिससे कैथल मार्ग पर वाल्मीकि मंदिर के साथ लगते तालाब में उसका कैंटर उतर गया। उसने बड़ी होशियारी के साथ कैंटर से कूदकर अपनी जान बचाई। बाद में इसकी सूचना मालिकों को दी गई जिससे सुबह क्रेन मंगवाकर तालाब में पड़े दूध के कैंटर को निकाला गया।
ठंड से बचने के लिए लिया अलाव का सहारा
सीवन। सोमवार को ठंड भी अपने चरम पर पहुंच गई। नव वर्ष का पहला दिन बेहद ठंडा रहा और दिन भर लोग अलाव का सहारा लेते देखे गए। रविवार शाम से ही धुंध ने क्षेत्र को अपने चपेट में ले लिया था। शाम करीब 7 बजे इतनी धुंध हो गई कि पैदल चलना तक कठिन हो गया। जगह जगह बाजारों में दुकानदार व अन्य लोग आग के अलाव के पास खड़े आग तापते देखे गए। बाजारों में भी चहल पहल काफी कम रही। कोहरे ने भी आज वाहन चालकों को भारी परेशान किया। घना कोहरा होने के कारण वाहन लाइटें जला कर हॉर्न बजाते हुए धीरे धीरे एक दूसरे के पीछे रेंग कर सफर पूरा कर रहे थे। पूरा दिन सूर्य देवता के दर्शन तक नहीं हो पाए। कृषि विदों का मानना है कि गेहूं की फसल को भरपूर लाभ मिलेगा।
दृश्यता 5 मीटर से भी कम, अधिकतम तापमान धड़ाम
- कड़ाके की ठंड में हुआ नए साल का आगाज, 15 डिग्री सेल्सियस पहुंचा अधिकतम तापमान
- दो दिन में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट, गेहूं की फसल के लिए लाभदायक तो सब्जी की फसल में हो सकता है नुकसान
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