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जीएसटी की मार: बिना जीएसटी के हो रहा है बाजार में व्यापार

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जीएसटी की मार : बिना जीएसटी के हो रहा है व्यापार
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जीएसटी लागू होने के 14 दिन बाद भी बाजार में जीएसटी के माध्यम से व्यापार नहीं हो सका है। जिस कारण दुकानदारों व ग्राहकों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। इसके साथ ही बाजार में लोकल मार्का के माल की सप्लाई पर भी रोक लगी है। बाजार में बिना जीएसटी के ही व्यापार चल रहा है। हालांकि कुछ दुकानों पर जीएसटी के अनुसार बिल वाला माल आने तो लगा है। लेकिन उपभोक्ता ज्यादा महंगेे प्रोडक्ट की ओर नहीं जा रहे।
लोकल मार्का लगा माल बाजार में आना बंद
कॉन्फेक्शरी संचालक हरिश ने बताया जीएसटी लगने के बाद भी बाजार में मंदी की मार है। अब लोकल मार्का लगा माल बाजार में आना बंद हुआ है। जिसमें पानी, जूस, सॉस व नूडल्स शामिल है। पहले इस माल की सप्लाई धड़ल्ले से होती थी। लेकिन जीएसटी के बाद यह माल आना बिल्कुल बंद हो गया है।
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बेकरी में बनने वाले बिस्कुट की लागत भी हुई कम
बेकरी मालिक कपिल कुमार ने बताया कि जीएसटी के बाद बेकरी में निर्मित बिस्कुट, पेटिज, रस आदि महंगे हुए है। जिस कारण अब ग्राहक बना हुआ माल खरीदने की बजाय अपने समान से बनवाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। पहले से 30 प्रतिशत तक बेकरी में निर्मित बिस्कुट को बनाने में कमी आई और 30 प्रतिशत ही लोगों द्वारा अपने सामान से बनाए जाने वाले बिस्कुट में बढ़ोतरी हुई है।

ब्रांडेड माल हुआ मंहगा, दालें मिलने लगी सस्ती
परचून दुकानदार प्रेमचंद ने बताया कि जीएसटी के बाद जितना भी माल ब्रांडेड है उसके दाम में बढ़ोतरी हुई है। जबकि खुली दाल पर कोई टैक्स न लगने के कारण वह सस्ती हुई। यदि इन दालों पर किसी ब्रांड का मार्का लग जाए तो 5 से 12 प्रतिशत तक मंहगी हो जाती है। साबुुुुन, तेल, शैंपू व खुला आटा, दालों के दामों में गिरावट आई है। लेकिन इनके पैकटों पर मेन्यूफैक्चरिंग व दामों की लिस्ट में कोई कमी नहीं आई है।

चप्पल भी हुई मंहगी
जीएसटी के बाद फुटवियर व्यापार भी काफी प्रभावित हुआ है। फुटवियर व्यापारी रोहित कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा 500 रुपये से अधिक के फुटवियर पर टैक्स लगाए जाने के बाद से उनके व्यापार में मंदी आई है। जीएसटी के बाद केवल 80 रुपये मिलने वाली रिलेक्सो की चप्पल भी दस रुपये मंहगी होकर 90 रुपये में मिल रही है। लेकिन ग्राहक बढ़े हुए रुपये देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में दुकानदार को काफी परेशानी होती है।

कॉस्मेटिक सामान की कीमतें बढ़ी
हॉलसेल कॉस्मेटिक सामान के दुकानदार रवि ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद कॉस्मेटिक सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। अभी तक सामान पर लगे एमआरपी में कोई बदलाव नहीं आया है। कंपनी से आने वाले मॉल पर जीएसटी के तहत बिल बन रहा है। लेकिन मार्केट में यह लागू नहीं हुआ है। जिस कारण ग्राहक एमआरपी से ज्यादा रेट देने से कतराता है। काफी परेशानी होती है।

जीएसटी टैक्स देने में ग्राहक करता आनाकानी
मिष्ठान भंडार के मालिक अनिल दुआ ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकान पर जीएसटी के तहत माल खरीदना और बेचना शुरू कर दिया है। लेकिन बेचे गए समान में बने जीएसटी को ग्राहक द्वारा न दिए जाने पर काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसा केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि अधिकतर दुकानदारों ने जीएसटी के तहत व्यापार करना शुरू नहीं किया है। जीएसटी को ग्राहक हो या दुकानदार दोनों की समझने की जरूरत है।
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जीएसटी के बाद कपड़ा व्यापार ठप
कपड़ा व्यापारी बृज मोहन ने बताया कि जीएसटी के बाद कपड़े में कोई भी नई वैरायटी न आने के कारण व्यापार पिछले करीब 15 दिनों से ठप पड़ा है। अभी वैसे भी मंदी की मार है। इसलिए काफी परेशानी हो रही है। जब होलसेल बाजार में कपड़ा मिलना शुरू होगा, तभी इस व्यापार में जीएसटी के प्रभाव का पता चल सकेगा।
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