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नहीं आया गणित अध्यापक तो पार्षद ने उठाया बच्चों को पढ़ाने की बीड़ा

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नहीं आया गणित अध्यापक तो पार्षद ने उठाया बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गांव खानपुर के राजकीय मिडिल स्कूल में गणित अध्यापक न होने से आ रही बच्चों की परेशानी को देखते हुए जिला पार्षद रेनू बाला बच्चों को पढ़ाने की बीड़ा उठा लिया। वे बीते 12 दिनों से गांव के स्कूल में जाकर बच्चों को गणित पढ़ा रही हैं, जिससे बच्चे भी काफी खुश हैं। वे नियमित तौर पर छठी, सातवीं व आठवीं की कक्षाएं ले रही हैं।
गत 3 माह पूर्व यहां गणित की अध्यापिका नियुक्त थीं, वह प्रमोशन के बाद लेक्चरार बनकर दूसरे स्कूल में चली गई। इसके बाद से यहां गणित अध्यापक का पद खाली है। इस स्कूल के बच्चे लगातार गणित में कमजोर होते जा रहे थे। कुछ बच्चों को तो जोड़, घटाना व भाग के सवाल तक नहीं आ रहे थे। इसकी जानकारी अभिभावकों ने जिला परिषद वार्ड 10 से पार्षद एवं भाजपा महिला मोर्चा की जिला महामंत्री रेनूबाला सैनी व गांव के सरपंच रामनाथ सैनी को दी। ग्रामीणों ने कहा कि अभिभावक यहां अपने पैसे से अध्यापक नियुक्त कर लेंगे। इसके लिए आर्थिक सहयोग की अपील की। लेकिन एमकॉम पास रेनू बाला ने कहा कि बच्चों के भविष्य का सवाल है और गांव खानपुर उनका अपना गांव है तो वह स्वयं निशुल्क बच्चों को गणित की शिक्षा देंगी। इसके बाद 1 जुलाई से लगातार वे छठी के 39, सातवीं के 37 व आठवीं कक्षा के 36 विद्यार्थियों को अलग-अलग सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे तक गणित की शिक्षा दे रही हैं। बच्चे भी अपनी नई मैडम से शिक्षा पाकर काफी खुश हैं और वे बे-हिचक सवाल-जवाब भी कर रहे हैं।
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निशुल्क दे रही हैं पूर्व में कोचिंग
पार्षद रेनू सैनी पहले भी गांव की गरीब लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा दिलवा रही हैं। गांव के सरपंच रामनाथ सैनी ने कहा कि रेनू ने गांव की 15 से अधिक गरीब लड़कियों के बीए में एडमिशन करवाए हैं, उनकी एडमिशन, फीस, किताबों का खर्च भी वह स्वयं दे रही हैं। इसके अलावा वह दोपहर को पढ़ाई में कमजोर गरीब परिवार के बच्चों को निशुल्क ट्यूशन भी पढ़ा रही हैं। उसके पास 100 से अधिक बच्चे ट्यूशन पढ़ने आते हैं।
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शिक्षा में पीछे न रहे गांव
रेनू सैनी का कहना है कि उनका एक ही सपना है, गांव शिक्षा के क्षेत्र में पीछे न रहे। गणित अध्यापक की जरूरत थी तो उन्होंने खुद पढ़ाने का फैसला लिया। जिसमें उनके पति अनिल सैनी व सास-ससुर ने भी पूरा सहयोग दिया। जब तक स्कूल में कोई नियमित गणित टीचर नहीं आ जाता, वे प्रतिदिन बच्चों की गणित की क्लास लेती रहेंगी।
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