ढांड। सरकार ने अनाज मंडी किसानों की फसल डालने के लिए बनाई है। जब मंडी में फसलों की सरकारी खरीद ही नही करनी है तो मंडी का क्या औचित्य। फिर तो मंडी के नाम पर किसानों से ली गई जमीन को वापस कर दो। उसके बाद जो होगा सो देखा जाएगा। मंडी में आए प्रशासनिक अधिकारियों को किसानों ने तल्ख लहजे में इस प्रकार से खरी-खरी सुनाई।
इसके बाद किसानों ने आरोप लगाया है कि कई दिनों से मंडी में गेहूं की फसल को लिए बैठे हैं। लेकिन सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी गेहूं खरीदने का नाम ही नहीं ले रहे है। बल्कि किसानों को मंडी से 10 किलोमीटर दूर सोलूमाजरा अदानी में ले जाकर बेचने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनके पास अपना कोई साधन नहीं है। किराए पर साधन करके जाएं तो उन्हें सोलूमाजरा के लिए 2000 रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे। जिसको किसान वहन करने में असमर्थ हैं। इसलिए हम तो अपनी फसल को यहीं लिए बैठे हैं, खरीदनी है तो खरीदो। प्रशासनिक अधिकारियों ने दिनभर किसानों को मनाने के प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने और आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों को किसानों के आगे झुकना ही पड़ा। दोपहर बाद कौल मंडी में वेयर हाउस द्वारा गेहूं की खरीद का कार्य शुरू किया गया। इस मौके पर डीएमईओ मार्केट कमेटी कैथल राममेहर जागलान, कमेटी सचिव ढांड सुरेंद्र सिंह, मैनेजर वेयरहाउस कौल जगदीश, नोडल अधिकारी प्रतिनिधि एडीओ. डा. ओमप्रकाश मौजूद रहे।
डीएम वेयर हाउस कैथल वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एफसीआई द्वारा अदानी में किसानों की खुली गेहूं लाने के लिए एजेंसी को कहा गया था। लेकिन किसानों ने ट्रांसपोर्ट की समस्या का हवाला देकर कौल मंडी में ही गेहूं डाल दी है। किसानों की समस्या को ध्यान में रखते हुए कौल मंडी में गेहूं की खरीद शुरू करवा दी गई है। भविष्य में भी मंडी में खरीद जारी रहेगी। जिन किसानों के पास अपने साधन है उन्होंने मौसम ठीक होने के बाद अदानी में आढ़तियों के माध्यम से गेहूं लाने की बात कही है।