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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे महिला चिकित्सा विभाग में एनआरएचएम की टीम ने किया दौरा

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मैडम! ओपीडी चलाना हो रहा है मुश्किल
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- महिला चिकित्सा विभाग में एनआरएचएम की टीम ने किया दौरा, डॉक्टरों ने रोया डॉक्टरों की कमी का रोना
- कैसे किया जा सकता है शिशु व मातृ मृत्यु दर को कम दो दिन तक टीम ने हासिल की जानकारी
फोटो संख्या-21 व 22
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कई बार सुर्खियों में आ चुके जिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में काम-काज की जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने दो दिनों तक बारीकि से निरीक्षण किया। अधिकारियों को इसमें आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। साथ ही यहां नए उपकरण लगाए जाने के बारे में भी आदेश जारी किए। टीम दो दिनों से कैथल में थी, बुधवार को पूरी जानकारी हासिल करने के बाद दो सदस्यीय टीम लौट गई। वहीं टीम के सामने डॉक्टरों ने अस्पताल में चिकित्सक और स्टाफ की कमी का रोना रोया।
लेबर रूम में बारीकि से किया निरीक्षण : एनएचएम की टीम में शामिल डॉ. अल्का व डॉ. सिमी ने अस्पताल के लेबर रूम में करीब 3 घंटे तक बारीकि से निरीक्षण किया। एक-एक उपकरण की जानकारी हासिल की। साथ ही यहां दो नई मशीनें रखवाई गईं। जो स्टोर में रखी हुई थीं। बुधवार सुबह डॉ. ओमप्रकाश व अन्य चिकित्सकों के साथ बुधवार को करीब दो घंटे तक मीटिंग कर आवश्यक जानकारी हासिल की। साथ ही पूरा रिकॉर्ड भी मंगवाया। बैठक में मंथन हुआ कि यहां किस-किस उपकरण को विकसित किए जाने की जरूरत है। साथ ही कैसे नई तकनीकों की जानकारी हासिल कर चिकित्सक मरीजों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
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प्रसव के दौरान बनेंगे अलग-अलग केबिन : अस्पताल सूत्रों ने बताया कि टीम में शामिल डॉक्टरों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों को बताया है कि लेबर रूम में अब सभी गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से केबिन मिलेगा। साथ ही यहां से रेफर किए जाने वाले केसों के लिए अलग से रजिस्टर लगाया जाए। इसके अलावा भी कई नए उपकरण जो मिशन की ओर से निर्देशित हो चुके हैं, उन्हें विकसित किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
शौचालय में हो चुकी है डिलीवरी : जिला अस्पताल का प्रसव विभाग कई बार सुर्खियों में आ चुका है। यहां शौचालय में प्रसव से लेकर नवजात बच्चों की मौत तक के मामले सामने आ चुके हैं। कई मरीजों ने यहां सीएम विंडो में लापरवाही की शिकायत दी हुई है। दो माह पूर्व ही यहां शौचालय में डिलीवरी के दो मामले सामने आए थे।
चिकित्सकों सहित स्टाफ सदस्यों की कमी से जूझ रहा है महिला वार्ड : जिला अस्पताल के महिला वार्ड में महिला डॉक्टरों की भारी कमी है। यहां महज 3 महिला डॉक्टर हैं। जिन्हें ओपीडी, ऑपरेशन, सामान्य डिलीवरी, दाखिल मरीजों की देखभाल सहित सभी कार्य करने पड़ते हैं। जबकि 200 बेड के अस्पताल में 6 डॉक्टरों की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि टीम के साथ हुई बैठक में डॉक्टरों ने यहां महिला डॉक्टरों की कमी की बात को गंभीरता से रखा और बताया कि यहां ओपीडी चलाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
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अस्पताल इंचार्ज डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि यह एक सामान्य निरीक्षण था। जो हर जिले में होता है। जच्चा-बच्चा वार्ड में कैसे सुविधाओं को और अधिक विकसित किया जा सकता है। इस संबंध में चंडीगढ़ से आए चिकित्सकों ने जानकारी हासिल की और आवश्यक निर्देश दिए हैं। उनके निर्देशानुसार लेबर रूम में सुधार किया जाएगा।
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