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खराब मौसम के कारण मंडी में खरीददार का इंतजार करते रह गए किसान

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खराब मौसम के कारण मंडी में खरीददार का इंतजार करते रह गए किसान
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न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम बिक रहा है धान, नमी का बहाना बनाकर दी जा रही है किसानों को प्रति क्विंटल 200 से 270 रुपये तक कम कीमत
सरकारी रिकॉर्ड में पूरा 1770 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य किया जा रहा है दर्ज
अधिकारी एक दूसरे पर डाल रहे हैं जिम्मेदारी
फोटो संख्या-19 से 21
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वीरवार सुबह आसमान में छाए बादलों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इस समय धान का सीजन चरम पर है। मंडी में धान के अंबार लगे हुए हैं। लेकिन मौसम में बारिश की संभावनाओं के चलते वीरवार को ग्राहक ना के बराबर रहे। किसान अपनी धान बिक्री का इंतजार करते रह गए। किसानों का आरोप है कि अनाज मंडी में उन्हें पूरा न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा। जिस कारण प्रति क्विंटल उन्हें 200 से 250 रुपये तक नुकसान हो रहा है।
मंडी में संगतपुरा क्षेत्र में धान की खेती कर रहे किसान जसवंत सिंह ने कहा कि वह तीन दिन से अपनी धान लेकर यहां बैठा हुआ है। उसकी धान वीरवार को 1625 रुपये प्रति क्विंटल बिकी। जबकि सरकारी रजिस्टर में यह पूरा 1770 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। उसी समय यहां पहुंचे हैफेड के कर्मचारी ने जिम्मेदारी आढ़ती पर डाल दी। आढ़ती के मुनीम ने हैफेड के अधिकारी पर डाल दी। इसी प्रकार से कसान निवासी किसान कुलदीप ने कहा कि उसकी धान का ग्राहक ही नहीं आ रहा। अब वह यहां दो दिन से तो बैठा है, ना जाने कितने दिन और बैठना पड़ेगा। जब नहीं बिकेगी तो मजबूरन कम कीमत में बेचनी पड़ेगी। यही बात अधिकतर जमींदारों के साथ हो रही है।
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इस संबंध में मार्केेट कमेटी सचिव नरेंद्र कुंडू ने कहा कि खरीद एजेंसियों व मिलर्स द्वारा मिलकर खरीद की जा रही है। यदि किसी किसान को कम कीमत मिल रही है तो वह लिखित में शिकायत दे। संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वहीं मार्केट कमेटी चेयरमैन राजपाल तंवर ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की धान खरीदी जा रही है। यदि किसी किसान को पूरी कीमत नहीं मिल रही है तो वह शिकायत दे। मौखिक तौर पर उन्हें भी जानकारी नहीं मिली है, इसके बारे में उन्होंने आला अधिकारियों को सूचना दे दी है।
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वहीं नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि किसान की फसल उसकी मर्जी के बिना नहीं बेची जा सकती। वीरवार को मौसम खराब होने के कारण कुछ ग्राहक कम रहे। लेकिन नमी ज्यादा होने के कारण खरीददार पूरी कीमत नहीं दे सकते। क्योंकि सूखने पर यह धान कम हो जाती है। किसान नमी ज्यादा होने के बावजूद धान बेच रहे हैं, क्योंकि जितनी कीमत उन्हें कम मिल रही है, उसकी उतनी भरपाई धान की ज्यादा नमी होने के कारण बढ़े हुए भार से पूरी हो जाती है।
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