अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल चौधरी ने कहा कि आगामी 18 फरवरी को देशभर में जाट आरक्षण आंदोलन में वर्ष 2010 से 2017 तक शहीद हुए युवाओं का बलिदान दिवस मनाया जाएगा। इसके लिए हरियाणा, पंजाब, यूपी, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित मध्य प्रदेश में भी जिला स्तर पर कार्यक्रम होंगे। इन कार्यक्रमों में सरकार द्वारा पिछले साल 19 मार्च को हुए जाट आरक्षण के लिए समझौते की शर्तों को लागू ना करने पर रोष प्रकट किया जाएगा। 36 बिरादरी के साथ मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित होगा। जिसमें प्रदेश स्तर पर भी बैठक होगी। सरकार के साथ हुए समझौते की शर्तों में से केंद्र व प्रदेश स्तर पर जाट सहित पांच जातियों को आरक्षण दिए जाने की बात लंबित है। धरने में शहीदों के परिजनों को नौकरी दिए जाने, आंदोलन में दर्ज मामलों को निपटाए जाने व जेलों में बंद युवाओं को रिहा ना किए जाने के मामले लंबित हैं। अब एक बार फिर सरकार द्वारा सर्वे करवाए जाने की बात कही जा रही है। जो जाट आरक्षण आंदोलन के मुद्दे को लंबा खींचने की साजिश है।
रविवार को कैथल के जन्नत होटल में मीडिया से बातचीत में मलिक ने कहा कि कैप्टन अभिमन्यु के इशारे पर युवाओं को जेलों में बंद किया गया है। वर्ष 2016 में हरियाणा को जलाने की शुरुआत ओपी धनखड़ के मौसा ने की थी। आज तक उनके आंदोलनों में कभी हिंसा नहीं हुई। हिंसा करने वाले लोग सरकार के इशारे पर हरियाणा को बांटने का काम कर रहे हैं। सांसद राजकुमार सैनी ने भड़काऊ बयानबाजी की। वे मंझे हुए राजनेता हैं, सरकार ने इस राजनेता का प्रयोग कर हरियाणा को जलाने का काम किया। कैथल में चंदा विवाद के प्रश्न पर मलिक ने कहा कि कुछ लोगों को सारे चंदे का हिसाब दे दिया गया। लेकिन वे फिर भी आरोप लगा रहे हैं तो समाज ही इस बात का फैसला करेगा कि कौन सही है, कौन गलत। ऐसे लोगों पर उनकी हत्या का प्रयास करने का आरोप लगा है। उन्हें निश्चित तौर पर जेल होगी। 26 नवंबर की रैली को प्रभावित करने के लिए सरकार के हाथों खेलकर कई तरह के हथकंडे अपनाए गए। जबकि वह एक सामाजिक कार्यक्रम था। बलिदान दिवस की तैयारियों के लिए अभी तक कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला व कैथल में बैठकें हो चुकी हैं।
सरकार द्वारा जातिगत आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए मलिक ने कहा कि सरकार 2.41 लाख कर्मचारी बता रही है। जबकि आरटीआई में पता चलता है कि 3.38 लाख कर्मचारी हैं। 6 जातियों की जनसंख्या 35 प्रतिशत है। उन्हें नौकरी में 27 प्रतिशत दिखाया गया है। जाट समाज की मांग है कि उन्हें बीसी बी में शामिल कर बीसी बी का प्रतिशत 11 से बढ़ाकर 14 किया जाए, बीसी ए का 11 प्रतिशत कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक आरक्षण सहित अन्य मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाज द्वारा तैयार किया गया कोचिंग इंस्टीट्यूट सामाजिक स्तर पर चलाया जाएगा। पंच से लेकर एमएलए व सांसद तक का चुनाव लडने वाला कोई भी व्यक्ति इसकी कार्यकारिणी में नहीं होगा। एक प्रदेश से अधिकतर 15 सदस्य इसमें रखे गए हैं। इसकी शाखाएं जिलास्तर पर खुलेंगी। जिसमें सभी वर्गों के बच्चों को कोचिंग दी जाएगी। सामाजिक संस्थाएं बलिदान से चलती हैं। इस अवसर पर उनके साथ समिति के नेता बलवान कोटड़ा, प्रवीण किच्छाना, अशोक बल्हारा सहित अधिकतर समिति सदस्य व समाज के लोग मौजूद थे।
बलिदान दिवस पर होगी आंदोलन की रणनीति तैयार
- देश के 170 से अधिक जिलों में मनाया जाएगा 2010 से 2017 तक जाट आरक्षण आंदोलन में शहीद हुए युवाओं का बलिदान दिवस
- कैथल में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने लगाए सरकार व भाजपा पर आरोप
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