अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर के आस-पास से गुजर रहे हाईवे हों या शहर के आंतरिक मोड़, चौक-चौराहे कहीं भी संकेतक, सूचक, साइन बोर्ड नहीं है। कई जगह तो सफेद पट्टी तक की व्यवस्था नहीं हैं। जिस कारण लोग जान गंवा रहे हैं। रात के समय इन आवश्यक सूचना पट्ट की अधिक जरूरत होती है। विभाग द्वारा इन्हें न लगाए जाने के कारण वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
इन हाईवों पर नहीं है सूचना संकेत
शहर में प्रमुख रूप से एक राष्ट्रीय राजमार्ग व चार राज्य राजमार्ग हैं, जो कैथल को अन्य जिलों व पंजाब से जोड़ रहे है। यहां दिशा बताने वाले सूचक पट्ट ही नहीं है। विभाग की ओर से समय-समय पर इसके लिए टेंडर निकाले जाते हैं। इसके बाद भी यह कार्य अधूरा रह जाता है। शहर में जींद कैथल बाईपास, खनौरी-पातड़ा व टोहाना मार्ग, अंबाला बाईपास, कुरुक्षेत्र बाईपास व करनाल बाईपास पर कोई भी सिग्नल प्वाइंट नहीं है। जिस कारण पिछले कुछ महीनों में सड़क हादसों में बढ़ोतरी हुई है।
शहर के भीतर भी नहीं
शहर के पुराना बस स्टैंड पर बने चौक, खुराना रोड पर वाल्मीकि, विश्वकर्मा व अर्जुन नगर स्थित भगवान परशुराम चौक पर बने शहर के विभिन्न कॉलोनियों व अन्य चौक का रास्ते की दिशा बताने वाले सूचना पट्ट नहीं है। जिससे बाहर से शहर में आने वाले वाहन चालकों को शहर के भीतर के रास्तों के बारे में जानकारी नहीं मिलती।
सर्दी में आती विभाग को याद, गर्मी में नहीं कोई परवाह
विभाग को केवल केवल सर्दी की शुरुआत में इन्हें लगाने की याद आती है। अधिकारी इसके लिए अपने आला अधिकारियों को लिखते हैं। जिसके बाद विभाग के मुख्य कार्यालय से इसका बजट पास होता है। लेकिन गर्मी के समय विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं होती है।
नहीं है सफेद और पीली पट्टी
विभाग द्वारा अभी तक कुछ रास्तों पर सफेद और पीली पट्टी नहीं लगवाई है। जिस कारण रात के ड्राइविंग करने वाले वाहन चालकों को अपने साइड का पता तक नहीं चलता है। जो हादसों को एक कारण है। विभाग सड़कों पर सूचक पट्ट, सफेद व पीली पट्टी को लेकर बड़े दावे करता है। लेकिन उनका कार्य असंतोषजनक होता है। शहर में टोहाना व खनौरी पातड़ा मार्ग पर सफेद पट्टी ही नहीं है। इसके साथ ही जींद बाईपास से निकलने के बाद की सड़क पर सफेद पट्टी केवल नाम मात्र की रह चुकी है।
पिछले तीन माह में हुई इतनी मौतें
पिछले तीन माह में हाईवे पर हुए सड़क हादसों के कुल 47 मामले सामने आए है। जिसमें 55 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी वहीं 67 लोग गंभीर रूप से घायल हुए है। यदि हाईवे पर सूचक पट्ट और दिशा निर्देश देने वाले सिग्नल प्वाइंट हो तो इन हादसों में काफी कमी होती। सरकार के आदेशानुसार एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर सड़क मार्ग पर हादसों का कारण बनने वाले कारकों की खोज कर उनका निदान किया जाना था। इस कमेटी की एक बार बैठक हुई है। इसके बाद इसके बारे में कुछ अता-पता नहीं हैं।