हरियाणा सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान पशुपालकों की आर्थिक मदद के लिए पशु क्रेडिट कार्ड योजना की शुरूआत की गई थी। ताकि पशुपालक पशुओं के लिए सूखा चारा खरीद सकें। लेकिन अब इस योजना का दम निकलता नजर आ रहा है। बता दें कि इस योजना के तहत जिले से लगभग 16 हजार पशुपालकों ने आवेदन किए थे, जिसमें से अब तक 17 बैंकों द्वारा लगभग 1500 पशु क्रेडिट कार्ड ही बन पाए हैं।
पशुपालक सतीश कुमार, कृष्ण, मोहन, सतपाल, श्याम व सतप्रकाश ने बताया कि पशु क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने भी फार्म भरे थे, लेकिन कई बैंकों ने इस योजना के तहत लाभ न मिलने की बात कही। जिससे वह इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए। कई पशुपालकों का कहना है कि वह पिछले चार महीनों से बैंकों के चक्कर काट रहे हैं, कई बैंक दस्तावेजों में कमी निकाल देते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इस योजना के तहत कई बैंकों ने तो एक या दो ही पशु क्रेडिट कार्ड बनाए हैं। सरकार ने कम ब्याज दर पर स्कीम तो शुरू की है, लेकिन बैंक इसके लिए लोन पास नहीं करते।
चार फीसदी ब्याज दर के साथ एक साल में चुकाना है लोन-बता दें कि इस स्कीम के अंतर्गत पशुपालक को एक साल के अंदर चार फीसदी ब्याज के साथ लोन भरना है। यदि कोई पशुपालक क्रेडिट कार्ड से एक लाख 60 हजार रुपये से ज्यादा का लोन लेता है, तो उसे सामान्य ब्याज दर पर लोन दिया जाएगा। समय पर लोन चुकाने वाले पशुपालकों को ब्याज में सौ फीसदी की छूट दी जाएगी। यदि पशुपालक एक भैंस रखता है तो उसे लगभग 60 हजार रुपये तक, गाय रखने वाले को 40 हजार रुपये का लोन सरकार देती है। ऐसे ही यदि एक से ज्याद पशु रखता है तो उसके हिसाब से लोन की राशि भी बढ़ जाती है। यह लोन पशुपालक ने मासिक किस्त में भरना होता है।
विभाग ने पशु क्रेडिट कार्ड की वेरिफिकेशन कर बैंक को भेजा-पशुपालन एवं डायरी विभाग के उपनिदेशक डा. मंगल सैन ने बताया कि जिलेभर में लगभग दो लाख 80 हजार पशुओं की संख्या है। पशु क्रेडिट कार्ड के लिए लगभग 16 हजार आवेदन आए थे, इनमें से लगभग 1500 ही कार्ड अब तक बन पाए हैं। विभाग की ओर से वेरिफिकेशन के बाद बैंक को भेज दिया है। आगे की प्रक्रिया बैंकों की तरफ से होगी। जो भी पशुपालक बैंकों की शर्तों पर खरा उतरेगा उसका ही क्रेडिट कार्ड बनेगा।
इस संबंध में एलडीएम का कहना है कि