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शहर में हो रही है दूषित पानी की आपूर्ति, सांप के बच्चे तैरते हुए मिले

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कैथल। हरियाणा सरकार के एक और सुधार कार्यक्रम डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने प्यौदा रोड स्थित जन स्वास्थ्य विभाग के पंप हाउस व वाटर स्टोर टैंकों का औचक निरीक्षण किया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जिस प्रोजेक्ट से आधे से ज्यादा शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए पानी सप्लाई होता है। उस पेयजल में सांप जैसे कीड़े तैरते हुए दिखे। जिसे देखकर न केवल मित्तल बल्कि उनके साथ गए विभिन्न विभागों के अधिकारी भी हैरान रह गए। विभाग ने कहने को यहां 1 करोड़ रुपये पर 5 साल के लिए ठेका छोड़ा हुआ है। जिसके तहत ठेकेदार को यहां 13 कर्मचारियों की नियुक्ति करनी है। लेकिन मौके पर महज 2 कर्मचारी मिले। जिस कारण पूरे शहर को पेयजल आपूर्ति के प्रोजेक्ट की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल उठा। साथ ही पूरे टैंक में फैली गंदगी पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए। महज इतना कहा कि वे ठेकेदार को नोटिस जारी कर देेंगे। ऐसे में शहर के लोगों का स्वास्थ्य रामभरोसे है।
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मित्तल सुबह विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ प्यौदा रोड स्थित वाटर वर्कर्स में पहुंचे। जहां सबसे पहले वाटर टैंकों के पास पहुंचे। जहां सीवरेज की गंदगी की तरह से गंदगी मिली। यहां से निरीक्षण के बाद वे जहां पानी साफ होता है, उस छोटे टैंक के पास पहुंचे। जहां सांप के बच्चे तैरते हुए मिले। इसके बाद वहां शहर में आपूर्ति हो रहे पानी में एक ट्यूबवेल का डायरेक्ट पानी डाला जा रहा था। जबकि उसे बिना ट्रीट किए नहीं डाला जा सकता। क्योंकि इसी भू-जल में सुधार के लिए यह नहरी पानी प्रोजेक्ट बनाया गया था। इसके बाद मित्तल ने मौके पर ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को बुलाया। टीम में शामिल डॉ. संदीप जैन ने पानी के दो सैंपल लिए और कहा कि जिस तरह से गंदगी दिख रही है, वह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। साथ ही ट्य़ूबवेल का सीधा पानी पीने के पानी में नहीं मिलाया जा सकता। इसका टेस्ट पशु भी पसंद नहीं करेंगे।
टैंक की रखरखाव को दिया है 1 करोड़ का ठेका, मौके पर मिले महज 2 कर्मचारी:
मित्तल ने जब इन अव्यवस्थाओं के बारे में जनवास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा तो उन्हें बताया गया कि इस वाटर वर्कर्स की मेंटीनेंस के लिए विभाग ने 1 करोड़ रुपये का ठेका दिया है। जिसके तहत यहां ठेकेदार को 13 कर्मचारी रखे जाने हैं। जबकि मौके पर 2 कर्मचारी मिले। उन्हें बताया गया कि 2 रात को ड्यूटी करते हैं। जबकि दिन में जिस चौकीदार की ड्यूटी थी, वह भी नदारद मिला। मौके पर मौजूद कर्मचारियों को भी पूरा मानदेय नहीं दिया जा रहा। इस तरह से लाखों रुपये की राशि सीधा ठेकेदार की जेब में जा रही है।
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70 प्रतिशत आबादी में यहीं से जाता है पानी:
भू-जल में शोरा अधिक होने के कारण इस नहरी पानी परियोजना का निर्माण किया गया था। लेकिन इसी पानी में सीधा ट्यूबवैल चलाकर अधिकारियों की अनदेखी या मिलीभगत से वही भू-जल लोगों को बिना ट्रीट किए पिलाया जा रहा है। जिससे बचाने के लिए यह परियोजना बनाई गई थी। मित्तल ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे एक-एक करके इन तीनों टैंकों की सफाई सुनिश्चित करें ताकि कोई बीमारी न फैले। मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी सबमर्सिबल बोर से सीधे सप्लाई टैंक में डाले जा रहे पानी को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया, क्योंकि सबमर्सिबल बोर से सप्लाई टैंक में सीधा पानी नहीं डाला जा सकता है। ठेकेदार द्वारा जलघर पर तैनात किए गए सुपरवाइजर संजय शर्मा ने कहा कि एक माह में तीनों टैंकों की सफाई करवा दी जाएगी।
रॉकी मित्तल ने कहा कि उन्होंने विभाग के अधीक्षक अभियंता से इस बारे में बात की है। वे अब ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने व नोटिस जारी करने की बात कर रहे हैं। लेकिन हरियाणा में बिहार की तर्ज पर किसी तरह की जानलेवा बीमारी फैले, इससे पहले ही हमें सचेत रहना होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का सपना है कि प्रदेश साफ व स्वच्छ रहे। इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। यहां इतनी ज्यादा अव्यवस्थाएं, पानी में कीड़े, सबमर्सिबल सीधा टैंक में चलाए जाने सहित कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। जिसके लिए वे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजेंगे। वे फिर से इस वाटर टैंक का दौरा करेंगे।
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