फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करोड़ा की 21 साल की बेटी ने लहराया माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा

विज्ञापन
विज्ञापन
पाई। गांव करोड़ा की 21 साल की बेटी शोभा बनवाला ने साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। शोभा ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर तिरंगा फहराया है। गांव करोड़ा के साधारण से परिवार में जन्मी शोभा बनवाला सुपुत्री पाला राम(हरियाणा रोडवेज ड्राइवर) की बेटी ने मात्र 21 वर्ष की आयु में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848) पर देश का तिरंगा लहरा कर नाम रोशन किया अपने देश का नाम रोशन और अपने गौरवशाली देश भारत का मान सम्मान बढ़ाया।
विज्ञापन

गांव से लेकर माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने वाली शोभा बनवाला साधारण में मध्यम वर्ग में पली बढ़ी है। गवर्नमेंट की आर्थिक सहायता न मिलने पर इस अभियान को पूरा करने में लगभग 30 लाख का खर्च उठाना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर भी इनके पिता पाला राम ड्राइवर व चाचा जसमेर सिंह ने 30 लाख का कर्ज उठाकर बेटी के सपने को पूरा किया। शोभा बनवाला ने बताया उनके पिताजी और परिवार वालों ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। उनके पिताजी ही उनके प्रेरणादायक स्त्रोत रहे हैं। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ कर भी पिता ने हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया है और चाचा ने इनको हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने वाली, मां धारी ने मेहनत करने की शिक्षा दी है। शोभा बनवाला के माउंट एवरेस्ट अभियान 2019 को पूरा करने में बड़ों का आशीर्वाद और परिवार का बहुत बड़ा सहयोग रहा है।
शोभा बनवाला ने माउंटेन एवरेस्ट में आने वाली सभी कठिनाइयों को साझा किया। शोभा बनवाला ने बताया कि माउंट एवरेस्ट को फतह करना मौत से लड़ने के बराबर है। यह दुनिया की सबसे कठिन चढ़ाई है। बर्फबारी को चीरते हुए पर्वतारोही अपनी जान की बाजी लगाते हैं। अचानक से बर्फबारी का आना एक पर्वतारोही के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। गहरी खाई है और रात के दौरान चढ़ते समय अचानक से किसी लाश का सामने आना और उसे लांघकर आगे बढ़ना रूह तक कांप उठती है। उसने 26 मई सुबह 10.30 बजे एवेरस्ट 8848 मीटर विश्व की सबसे ऊंची चोटी को समिट किया और अपने देश भारत को रिप्रेजेंट करते हुए तिरंगा लहराया। इस अभियान को पूरा करने में लगभग 2 महीने का समय लगा। जिसके दौरान उन्होंने बेस कैंप में रहकर ट्रेनिंग की और अपने आप को वातावरण के अनुसार ढाला। इसके बाद कैंप 2 में पहुंच गए यहां पर ऑक्सीजन लगाकर सरवाइव करना पड़ा। फिर कैंप 3 में पहुंचने पर 36 घंटे का आराम करने के बाद लगातार चलते हुए डेड जोन को पार करना था और सामने दिखाई दे रहे अपने लक्ष्य को हासिल करना था। कैंप 4 को पार करते हुए दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे और देश का तिरंगा लहरा कर माउंट एवरेस्ट को समिट किया।
विज्ञापन

बनवाला ने बताया कि इससे पहले वह अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलीमंजारो 5895 मीटर को 20 नवंबर 2018 में फतह कर चुकी हैं। दूसरी यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्बोरस 5642 मीटर को नव वर्ष के उपलक्ष्य में 1 जनवरी 2019 को फतह किया था। इसके लिए उसने जवाहर इंस्टीट्यूट माउंटेनिंग और विंटर स्पोर्ट्र्स पहलगांव जम्मू कश्मीर में 29 अगस्त 2018 से लेकर 21 सितंबर 2018 में माउंटेनिंग की ट्रेनिंग की। जिसके दौरान अशोक शुक्ल राजस्थान का योगदान रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें