कैथल। जिले में एचआईवी पॉजिटिव मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस साल महज पांच महीने में ही एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है। यह पिछले साल में कुल 300 ही थी। जिला अस्पताल में एचआईवी के इलाज की सुविधा देने के बाद पीजीआई रोहतक से रेफर होकर आए मरीजों की संख्या भी देखी जाए तो जिले में 800 मरीजों का इस समय इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 18 से 20 साल के लड़के-लड़कियों में ये बीमारी सर्वाधिक है। वहीं नवदंपती भी एचआईवी की चपेट में हैं, जो जिला अस्पताल में प्रसव की जांच के लिए पहुंच रहे हैं। असुरक्षित यौन संबंध के अलावा संक्रमित सुई से इंजेक्शन के कारण यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है।
हर रोज 5 से अधिक मरीज मिल रहे हैं पॉजिटिव:
जिला अस्पताल में रोजाना करीब 2000 से अधिक की ओपीडी रहती है। इसमें अब करीब 4 से लेकर 5 मरीज एचआईवी पॉजिटिव निकल रहे हैं। अस्पताल में आने वाले लोगों की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों की जांच के लिए अलग से स्पेशल ओपीडी शुरू की गई है। एक साल पहले तक एचआईवी की जांच के लिए केवल गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार जांच के दायरे में टीबी के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और हाईटेंशन पॉपुलेशन को भी शामिल कर लिया गया है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बीमारी की संभावना होने पर अपनी जांच करवा सकें और मरीजों की बढ़ती संख्या व तेजी से फैल रही बीमारी पर अंकुश लगाया जा सके।
जिले में पांच जगहों पर बने आइसीटीसी सेंटर:
एड्स की जांच के लिए जिले में पांच स्थानों पर इंटीग्रेटेड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर बनाए गए हैं। यहां बीमारी के संभावति मरीजों की जांच और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। ये टेस्टिंग सेंटर कैथल, कलायत, गुहला, पूंडरी व राजौंद मे शुरू किए गए हैं। नो योर स्टेट्स थीम को ध्यान में रखते हुए यहां मरीजों की जांच की जा रही है।
2017 की तुलना में इस बार अब तक 4 हजार अधिक लोगों की हुई जांच:
वर्ष 2017 की बजाय 2018 में ढाई हजार से ज्यादा लोग अपनी एचआईवी की जांच करवाने के लिए पहुंचे। 2017 में जांच के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या जहां 18 हजार 500 थी। वर्ष 2018 में संख्या बढ़कर 21 हजार 150 तक पहुंच गई है। इस बार यह आंकड़ा 23 हजार को पार कर गया है।
जिला अस्पताल में इस समय 800 एचआईवी पॉजीटिव मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें से 200 मरीज इस साल नए डिटेक्ट हुए हैं। शेष मरीज रोहतक से रेफर हुए हैं। संभावना जताई जा रही है कि रोहतक सहित आस-पास के जिलों में इलाज करवा रहे जिले के सभी मरीज जिला अस्पताल में ही रेफर किए जाएंगे। इनकी संख्या फिर करीब 2800 तक पहुंच सकती है। अब एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को जिला अस्पताल में ही दवा दी जा रही है। पहले उन्हें रोहतक रेफर किया जाता था। जानकारी के अनुसार एक एड्स पीड़ित मरीज जिसकी उम्र महज 28 साल थी, उसकी मौत अभी हाल ही में हुई है। वहीं एक 22 साल का निजी स्कूल का ड्राईवर भी एड्स रोगी मिला था। जो दोबारा जांच के लिए जिला अस्पताल नहीं पहुंचा।
एचआईवी पॉजिटिव में दवा लेने पर लंबे समय तक जी सकता है व्यक्ति:
विशेषज्ञों ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव एड्स का शुरुआती चरण है। इसमें यदि जानकारी मिलने के बाद व्यक्ति समय पर दवा लेता रहे तो वह सामान्य व्यक्ति की तरह से अपना जीवन जी सकता है। यदि यह रोग अगले चरण में पहुंच जाए तो फिर उसका इलाज संभव नहीं है। सबसे बड़ी परेशानी कम उम्र के एचआईवी पॉजीटिव लोगों को खुद को बीमार मानने में आ रही है। क्योंकि उन्हें लगता है कि वे स्वस्थ हैं, लेकिन कुछ वर्षों बाद जब उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है तो उन्हें इस बीमारी का एहसास होता है।
कारण: एडस का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध है। पुरुषों के साथ पुरुष व फीमेल सेक्स वर्कर्स के कारण यह रोग फैल रहा है। दूसरा बड़ा कारण संक्रमित सुई से यह रोग फैल रहा है। एक संक्रमित व्यक्ति को जिस सीरिंज से इंजेकशन लगाया जाता है, ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में भी झोलाछाप डॉक्टर उसी सीरिंज से दूसरे व्यक्ति को इंजेकशन लगा देते हैं। यदि पहला व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है तो दूसरे को भी यह हो जाता है।
उपाय:-यौन संबंध बनाते समय सुरक्षा उपाय जरूर अपनाएं। असुरक्षित यौन संबंध ना बनाए जाएं।
झोलाछाप डॉक्टरों व विशेषज्ञों के अलावा किसी दूसरे प्रैक्टिशनर्स से इंजेकशन लगवाने से बचें।
जिला एड्स रोग निवारण योजना के प्रभारी डॉ. कक्कड़ ने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध व संक्रमित सुई से इंजेक्शन ही इस बीमारी के बड़े कारण हैं। सावधानी बरतने पर बीमारी से बचा जा सकता है। जिला अस्पताल में इस बीमारी के लिए दवा दी जा रही है।
वर्जन..
सीएमओ डॉ. सुरेंद्र नैन ने कहा कि मरीज पहले की तरह से सामने आ रहे हैं। फर्क इतना हुआ है कि विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जिस कारण एचआईवी पॉजिटिव मरीज ज्यादा सामने आ रहे हैं। इनका इलाज सहित काउंसिलिंग भी की जा रही है। लोग इस रोग के प्रति जागरूक हों और कारणों का पता लगने पर बचाव करें। यही इसका मुख्य इलाज है।