धान के सीजन में नकदी के लिए आढ़तियों के निकल रहे पसीने
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। एक साल पहले नोटबंदी के दौरान जिस तरह से नकदी की समस्या आई थी, अब उससे भी ज्यादा परेशानी खड़ी हो गई है। नई अनाज मंडी में स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं। जहां आढ़तियों को सीजन के चलते हर रोज करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की जरूरत है। लेकिन बैंक मुश्किल से 70 से 80 लाख रुपये तक ही दे पा रहा है। बैंक अधिकारी पीछे से नकदी न आने की बात कह रहे हैं, वहीं आढ़तियों की परेशानी है कि वे सीजन में अपना काम कैसे चलाएं। एलडीएम ने बैंक अधिकारियों से समस्या के कारणों का पता लगाने की बात कही है।
सीजन में नकदी न मिलने से परेशानी आ रही है। किसी आढ़ती को 2 लाख तो किसी को 10 लाख की हर रोज जरूरत है। लेकिन बैंक से नकदी न मिलने के कारण काफी दिक्कतें आ रही हैं। यहां सीजन को देखते हुए नकदी बढ़ाई जाए।
आढ़ती रामप्रताप
कैथल मंडी की धान के भुगतान के मामले में एक साख बनी हुई है। जिस कारण लोग यहां अपनी धान लेकर आते हैं। लेकिन नकदी की समस्या से आढ़ती परेशान हैं। बिना नकदी के कई तरह से भुगतान में परेशानी आती है।
बसंत जैन, वरिष्ठ समाज सेवी एवं आढ़ती
90 प्रतिशत आढ़तियों का खाता इस बैंक में हैं। सीजन में नकदी की जरूरत को देखते हुए बैंक में नकदी बढ़ाए जाने की जरूरत है। आढ़तियों को हजारों में नकदी दी जा रही है। जबकि जरूरत लाखों में हैं।
आढ़ती रमेश जैन
लगभग सभी आढ़तियों को औसतन 50 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान हो रहा है। जो नाकाफी है। यहां नकदी बढ़ाई जाए। ताकि आढ़ती किसानों व मजदूरों को भुगतान कर सकें।
विनोद शर्मा, आढ़ती
सीजन में जिस तरह से नकदी की कमी से नोटबंदी जैसे हालात बने हुए हैं। आढ़तियों को 50 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि इतनी कम राशि में काम नहीं चल सकता। सीजन को देखते हुए यहां नकदी बढ़ाई जानी चाहिए।
इसी बैंक में चेस्ट, सीधा आरबीआई से आता है कैश, फिर भी समस्या : बैंकर्स का कहना है कि इस बैंक में तो चेस्ट है। जहां सीधा आरबीआई से कैश आता है। अब कैश क्यों नहीं आ रहा, यह तो बैंक अधिकारी ही बताएंगे। लेेकिन चेस्ट वाली ब्रांच में नकदी की परेशानी कम ही देखने को मिलती है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश चौधरी का कहना है कि अनाज मंडी में सीजन को देखते हुए नकदी की व्यवस्था होनी चाहिए। बैंक अधिकारियों से मिल चुके हैं। लेकिन कोई परिणाम नहीं आ रहा है। आला अधिकारियों से मिलकर समस्या रखी जाएगी। आढ़तियों को नकदी की कमी के चलते काफी दिक्कतें हो रही हैं।
हम कुछ नहीं कर सकते, पीछे से नकदी कम : यहां कार्यरत बैंक अधिकारी ने कहा कि वे इसमें कुछ नहीं कर सकते। जरूरत हर रोज 10 से 12 करोड़ की है। जबकि नकदी की उपलब्धता करीब 70 से 80 लाख है। आला अधिकारियों के संज्ञान में मामला ला दिया गया है। जैसे ही नकदी आती है, उसी अनुसार आढ़तियों को भुगतान कर दिया जाएगा। पता करवाया जाएगा कि समस्या क्यों बनी हुई है?
चेस्ट की ब्रांच में ज्यादा परेशानी तो नहीं होनी चाहिए। यदि यहां दिक्कत है तो वे पता करवाएंगे। बैंक से जानकारी हासिल की जाएगी कि ऐसा क्यों हो रहा है।
के आर कटारिया, लीड बैंक मैनेजर
धान खरीद कर किसानों को भुगतान के लिए बैंक से नहीं मिल रही पर्याप्त नकदी
किसानों को भी देरी से मिल रही है नकदी, मजदूरों को शाम को नकदी देने में भी आ रही है परेशानी
बैंक में चेस्ट होने के बावजूद नकदी की समस्या, अधिकारियों ने कहा-हम स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं कर सकते
एलडीएम ने कहा-पता करवाया जाएगा कि क्या समस्या है
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