जमीन का कब्जा लेने गया प्रशासन बिना कार्रवाई लौटा
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। दो बसों और छह सात जीपों में सवार तकरीबन एक सौ महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारी, एसडीएम, डीएसपी, तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी, पालिका सचिव, पालिका इंजीनियर सहित एक दर्जन से अधिक अफसर व कर्मचारी वीरवार को जब टिल्ला प्लाट में जमीन का कब्जा लेने पहुंचे तो जमीन पर काबिज किसान परिवार के मुखिया कुंदन लाल ने गुहला कोर्ट द्वारा जारी स्टे वाला फरमान उनके सामने रख दिया। किसी भी तरह की परिस्थितियों से निपटने के तमाम साधनों से लैस होकर गया प्रशासनिक अमला एक बार तो सकपकाया और फिर आपसी सलाह मशविरे के लिए मजबूर हो गया। सलाह मशविरा हुआ और झटपट फैसला भी हो गया कि जब तक कोर्ट का स्टे कायम है तब तक कब्जे की कार्रवाई रोक दी जाए। किसान कुंदन लाल ने कहा कि उसने ये कागज डेढ़ माह पूर्व प्रशासन को दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन ने जबरदस्ती जमीन की बोली करवा दी और पुलिस प्रशासन का बंदोबस्त करके कब्जा लेने भी पहुंच गए।
टिल्ला प्लाट में नगर पालिका की मलकियत वाली यह वही जमीन है जिसको लेकर कुछ सालों से किसानों के दो पक्षों में खींचतान चली आ रही है। तकरीब 40 एकड़ रकबे पर पिछले 50 सालों से टिल्ला प्लाट के कुंदन लाल व उनके परिजनों का कब्जा है। हालांकि कुंदन लाल का परिवार बाकायदा इस जमीन की बोली देकर लगातार इसकी लीज भी भरता आ रहा है। टिल्ला प्लाट के ही किसानों के एक पक्ष के साथ कुंदन लाल परिवार की चल रही खुन्नस के चलते उक्त परिवार ने इस जमीन की बोली देने के पिछले साल भी प्रयास किए थे मगर इस बार वे कामयाब हो गए।
पिछले महीने नगर पालिका ने जब इस जमीन की बोली करवाने की प्रक्रिया शुरू की थी तो कुंदन लाल के परिवार ने बोली को रोकने के लिए कोर्ट से स्टे की बात कही थी, मगर पालिका प्रशासन ने स्टे को अपने पक्ष में बताते हुए बोली को जायज ठहराते हुए जमीन का कब्जा भी बोली देने वाले किसानों को दिलवाने का दावा किया था। मगर वीरवार को प्रशासन बिना कुछ किए लौट गया।
इस साल पालिका की तकरीबन साढ़े 5 सौ एकड़ कृषि योग्य जमीन को बोली पर चढ़ाने के लिए पालिका प्रशासन पांच बार प्रयास कर चुका है लेकिन बोली दाताओं के न आने के कारण हर बार बोली स्थगित की जाती रही है। अलबत्ता पालिका की लगभग 45-46 एकड़ विवादास्पद जमीनों की बोली एक पक्ष के मौजूद रहने के कारण जरूर सिरे चढ़ गई थी पर केवल 61 कनाल जमीन को छोड़कर बाकी जमीन का कब्जा नहीं दिलवाया जा सका।
इस सिलसिले में पालिका का पक्ष जानने के लिए नगर पालिका सचिव सुशील कुमार भुक्कल से संपर्क नहीं हो पाया। तो एमई ने भी किसी मीटिंग में होने की बात बताई, सारी बोला और फोन काट दिया।
यहां मिला कब्जा
टिल्ला प्लाट से लौटा दल बल उसके बाद डेरा शीतल सिंह पहुंचा और 61 कनाल 17 मरले जमीन का कब्जा किसान बलदेव सिंह को दिलवा दिया। बलदेव सिंह ने इस बार बोली देकर यह जमीन लीज पर ली थी। प्रशासन को हालांकि यहां टकराव की आशंका थी, पर दूसरे पक्ष द्वारा किसी भी तरह का विरोध न किए जाने के चलते कब्जे की कार्रवाई शांतिपूर्वक निपट गई।