तीन हजार की आबादी वाले गांव मलिकपुर में इस बार 1500 मतदाता सरपंची का फैसला करेंगे। गांव में विकास कार्य भी हुए हैं व गलियां नालियां भी पक्की हैं, लेकिन गांव में कुछ कार्य अभी भी शेष है।
इन्हें करवाना बाकी है। गांव में बस सुविधा, पशु अस्पताल, पानी की निकासी, अधूरा पड़ा खेल स्टेडियम गांव के विकास पर ग्रहण बनाए हुए हैं।
ग्रामीण कृष्ण कुमार, देसराज, पिरथी, मांगा राम, रामकुमार, जसबीर का कहना है कि सरकार ने जो सरपंचों के लिए शिक्षा योग्यता को अनिवार्य करने की पहल की है बहुत अच्छी है।
इससे गांव के विकास में कोई रुकावट नहीं आएगी। अधिक विकास कार्य होंगे। अनपढ़ सरपंच को विकास कार्य कराने में मुश्किलें आती थी। गांव में बस सुविधा, पानी की निकासी और हेल्थ सेंटर नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है।
सरपंच ऐसा बनना चाहिए जो गांव में पानी की निकासी का प्रबंध करवाए, गांव के लोगों के लिए बस सुविधा उपलब्ध करवा सके। वहीं हेल्थ सेंटर इसके अभाव के कारण ग्रामीणों को छोटी से छोटी बीमारी के लिए सात किलोमीटर दूर सीवन जाना पड़ता है और वह भी बस के अभाव के कारण ट्रैक्टर, मोटर साइकिल या फिर रेहड़ी में जाना पड़ता है।
गांव में पशु अस्पताल का होना भी आवश्यक क्योंकि अधिकतर ग्रामीण का रोजगार पशुपालन पर ही निर्भर है।
सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल स्टेडियम तो बना रही है लेकिन गांव में अधूरा पड़ा खेल स्टेडियम सरकार व प्रशासन के दावों की पोल खेल रहा है।
गांव के युवाओं के खेलने के लिए अधूरे पड़े स्टेडियम का कार्य पूरा करवाना भी सरपंच की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि गांव के खुवा भी खेलों में भाग लेकर गांव का नाम रोशन कर सके।
वहीं गांव मलिकपुर की सरपंच चरणजीत कौर का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में विकास करवाने में कोई कसर नही छोड़ी है। गांव की नालियां, गलियां पक्की करवाई है। पानी की निकासी का प्रबंध करवाया और गांव विकास के मामले किसी भी गांव से पीछे नही है। बस सुविधा और पशु अस्पताल अधूरे पड़े खेल स्टेडियम के काम को भी पूरा कराने का प्रयास किया। लड़कियों के स्कूल को अपग्रेड कराने के बहुत प्रयास किए ताकि गांव की सभी लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।