अनाज मंडियों में शुक्रवार को किसान बिक्री के लिए जीरी की 1509 किस्म की 2 ढेय्रियां लेकर पहुंची। लेकिन इस किस्म की जीरी के लिए मंडी में कोई भी खरीददार जीरी खरीदने के लिए नही पहुंचा।
जिससे किसानों को दिनभर खरीददारों की बाट देखनी पड़ी। बंदराणा निवासी किसान बाबू राम का कहना है कि किसान का जो दायित्व बनता था वो उसने पूरा किया।
आगे सरकार की मर्जी किसान को किस खाते में डाले। किसान का कहना है कि हम तो 6 महीने अपना खून पसीना बहाकर खूब खर्चा करके फसल को तैयार करके बेचने के लिए अनाज मंडी में लेकर आते है।
लेकिन जब मंडी में उनकी फसलों की खरीददारी न होने जो बेकद्री होती है उससे किसान काफी हतोत्साहित हो उठता है। किसानों का कहना है कि एक तरफ तो सरकार किसान का एक-एक दाना खरीदने की बात कहती है तो वहीं दूसरी ओर मंडियों में किसानों की जीरी को खरीदने के लिए न तो प्राईवेट खरीददार और न ही सरकार कोई दिलचस्पी दिखा रही है।
ऐसे में किसान अपनी फसल को बेचने के लिए जाए तो कहां जाए। यह उनकी समझ से परे है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि मंडियों में जीरी की फसल पहुंचते ही सरकार उनकी खरीद सुनिश्चित करे अन्यथा किसानों को इसके लिए सड़कों पर भी उतरना पड़े तो पीछे नही हटेंगे। जब इस बारे में मार्किट कमेटी सचिव जय प्रकाश ने बताया कि इस किस्म की जीरी की सरकारी खरीद नही है। जैसे ही प्राईवेट खरीददार खरीद के लिए पहुंचेंगे तो उसकी बोली करवा दी जाएगी।