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सफाई कर्मचारियों के धरने के मामले में सीएसआई के साथ मारपीट

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सफाई कर्मचारियों के धरने के मामले में सीएसआई के साथ मारपीट
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कर्मचारियों ने लगाया महिलाकर्मियों से दुर्व्यवहार का आरोप, महिला पुलिस व डीसी को दी शिकायत
सीएसआई ने कहा- उन्हें साजिश के तहत पिटवाया गया, डीसी व ईओ को दी लिखित में शिकायत
पुलिस सुरक्षा मिलने पर ही काम पर लौटूंगा
फोटो नंबर-01
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नगर परिषद से हटाए गए सफाई कर्मचारियों व सीएसआई के बीच सोमवार को हुए विवाद में हटाए गए कर्मचारियों ने सीएसआई के साथ मारपीट कर दी। जिसमें सीएसआई ने मौके से भाग कर पिंड छुड़वाया। बाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
महिला सफाई कर्मचारियों ने बताया कि 12 जुलाई 2018 की ठेका प्रथा बंद होने के कारण उनको 15 दिनों के सरकारी पत्र अनुसार काम पर रखना था। सरकार ने एक पत्र और जारी कर दिया जिसमें जवाब मांगा कि इन कर्मचारियों ड्यूटी पर क्यों नहीं रखा गया। जिसपर महिला कर्मचारी मोहन भारद्वाज से मिलने गईं थीं, जहां सीएसआई ने महिला कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया। जिस पर उन्होंने शोर मचाया तो अन्य कर्मचारी आ गए और इसी बीच सीएसआई कार्यालय छोड़कर निकल गया। इसके बाद महिला कर्मियों आशा, वर्षा, सीतो, माया, गीता, सुमन, सुनिता, शकुंतला, सुरेखा, कमला, राजरानी, महिंद्रो, सुनहरी, कमलेश व सीमा सहित अन्य ने सीएसआई पर छेड़छाड़ व दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए महिला थाने में व बाद में प्रदर्शन करते हुए डीसी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
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वहीं सीएसआई मोहन भारद्वाज ने कहा कि वे अपने कार्यालय में बैठे थे। जहां साजिश के तहत महिला व अन्य कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों ने उन्हें पिटवाया। जब तक उन्हें पुलिस सुरक्षा नहीं मिल जाती, तब तक वे काम पर नहीं जाएंगे। उन्होंने इस संबंध में डीसी व ईओ को लिखित में दे दिया है। उनपर दुर्व्यवहार के सारे आरोप निराधार हैं।
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दूसरी ओर कर्मचारी नेता रामशरण कल्याण ने किसी भी तरह की साजिश से इंकार करते हुए कहा कि उक्त कर्मचारी ने महिला कर्मियों से दुर्व्यवहार किया है। जब तक उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसी भी कर्मचारी ने सीएसआई के साथ मारपीट नहीं की है। ये आरोप निराधार हैं।
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