समझौता केंद्र बनकर रह गया महिला थाना, 3819 शिकायतें आईं 3597 पर करा दिए समझौते
-तीन साल में 222 एफआईआर दर्ज हुईं, महज 133 मामले पहुंचे न्यायालय
-जनसूचना अधिकार के तहत राव धनवीर सिंह को दी गई सूचना में खुलासा
-एसएचओ ने कहा-परिवार बचाने को आपसी तालमेल बनाने पर रहता है जोर
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। महिला थाने में पिछले तीन साल में जून 2018 तक अधिकतर पारिवारिक विवाद की 3819 शिकायतें प्राप्त हुईं। पुलिस ने इनमें से 3597 पर आपसी सुलह-समझौता कराके इन्हें थाने से ही निपटा दिया। पुलिस ने महज 222 एफआईआर दर्ज कीं। इनमें से भी कोर्ट में केवल 133 मामलों में चार्जशीट पेश की गई। इस तरह महिला थाना आपसी सुलह समझौते का केंद्र बनकर रह गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमारा प्रयास है कि परिवार ना बिखरें। इसीलिए अधिकतर पारिवारिक मामलों में आपसी मन-मुटाव दूर कराके समझौते का प्रयास रहता है।
यह खुलासा पुलिस से जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है। महिला थाने में 28 अगस्त 2015 से जून 2018 तक कुल 3819 शिकायतें आई थीं। इनमें से 222 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से भी 133 मामलों में कार्ट में चालान पेश किए गए। यह सूचना राव धनवीर सिंह ने मांगी थी। सूचना में बताया गया है कि इस दौरान कोई भी शिकायत झूठी नहीं पाई गई। 3597 मामलों में दोनों पक्षों के विवाद दूर कर समझौता हो गया है।
महिला पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई:
जन सूचना अधिकार के तहत बताया गया है कि महिला थाने में कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई की है। एसआई बबिता रानी को 11 मार्च 2017 में किसी मामले में लुक आउट नोटिस जारी करने के लिए एसपी के हस्ताक्षर ना करवाए जाने के लिए एक साल की वेतन वृद्धि रोक दी थी। वहीं महिला कर्मचारी हरप्रीत कौर ने दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल ना करवाए जाने पर पांच साल की वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। हालांकि बाद में माफी मांगने के बाद दोषमुक्त कर दिया गया। इसी प्रकार से एक अन्य महिला कर्मी सुदेश रानी समय से चालान पेश न किए जाने के एक मामले में एक साल की वेतन वृद्धि रोक दी गई थी।
-अधिकतर शिकायतें पारिवारिक विवाद की थीं। जिस कारण परिवार को बचाने के लिए दोनों पक्षों में आपसी समझौते करवाने पर जोर रहता है। क्योंकि एक परिवार के टूटने से उसके बच्चों सहित सभी का जीवन प्रभावित होता है। महिला विरुद्ध अपराधों के मामलों में केस दर्ज किए गए हैं। जिनकी न्यायालय में पुरजोर पैरवी भी की जा रही है।
-निर्मला, महिला थाना प्रभारी