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बजट न मिलने पर पंद्रह बसों के थमे पहिए, हर रोज लाखों का नुकसान

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बजट न मिलने पर पंद्रह बसों के थमे पहिए, हर रोज लाखों का नुकसान
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज वर्कशॉप सामान के अभाव में 15 बसें खड़ी हैं। जिस कारण उन रूटों पर लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां टेक्निकल कर्मचारियों की कमी के साथ साथ यहां बसों को दुरुस्त करने के लिए स्पेयर पार्ट की कमी भी बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है। पिछले तीन माह से बसों की रिपेयरिंग में प्रयोग में लाए जाने वाले स्पेयर पार्ट्स की कमी में कर्मचारी अन्य खड़ी बसों में स्पेयर पार्ट निकालकर बसों को ठीक करने का कार्य कर रहे है।
बैटरियों की कमी में जाम हुए 15 बसों के पहिए
वर्कशॉप में बैटरियों की कमी के कारण कुल 15 बसों को पहिया थमा है। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। इन बसों के न चलने के कारण छह रुटो पर 25 चक्करों का प्रभाव पड़ा है। हालांकि यह रूट लंबे न होकर लोकल है लेकिन इसके बावजूद भी रोडवेज को आए दिन एक बस की आमदन के तहत 10 से 15 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। यदि यह बसें सडक़ों पर चलने लगे तो रोडवेज विभाग को एक से डेढ़ लाख रुपये का प्रतिदिन नुकसान न उठाना पड़े। बेटरी के अभाव में कुराड़, करोड़, खरकां, असंध व चीका रूट पर चलने वाली बसेेेें वर्कशॉप में खड़ी है।
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पिछले दो माह से नही आई एक भी बैटरी
बैटरी कक्ष के इंचार्ज श्याम लाल ने बताया कि सरकार के बजट के अनुसार एक महीने में कुल 30 बैटरियां वर्कशॉप में भेजी जाती हैं। लेकिन पिछले दो महीनों से सरकार की ओर से बैटरियों का कोटा न दिए जाने पर स्टोर में एक भी बैटरी नहीं आई है। उन्होंने बताया कि दो महीने से पहले छह माह के दौरान भी 30 की बजाय 10 से 15 बैटरियां आई है।

केएमपीएल की नहीं दे पाते जानकारी
चालक कृष्ण गुलियाणा ने बताया कि बसों में बैटरी के अभाव में उसे बंद नहीं किया जा सकता। जिस कारण बसों में अधिक पेट्रोल लगता है। जिससे बसों द्वारा दी जाने वाली प्रति किलोमीटर की एवरेज में कमी आती है। लेकिन रोडवेज विभाग के अधिकारी उन्हें प्रति किलोमीटर अधिक एवरेज न देने का हवाला देकर उनके वेतन में से जुर्माना काट लेते है। काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हेडलाइट व रिफलेक्टरों की भी स्टोर में कमी
इलेक्ट्रिशयन मोहन लाल ने बताया कि वर्कशॉप में हेडलाइट, एसेंबली, रिफ्लेक्टर, फलेशर इंडीकेटर, व्हील बॉक्स, बैक लाइट, गोल हेडलाइट व छुटर क्रेन की भी भारी कमी है। यह सभी दस दिनों में कम से कम 15 चाहिए होती है। लेकिन इतनी तो यह एक महीने में आ रही है। अगले महीने से रिफ्लेक्टर की मांग बढ़ जाएगी। लेकिन इसके अभाव में काफी परेशानी होती है।
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जल्द होगा समस्या का समाधान
वर्कशॉप में जिस भी सामान की कमी है। उसके लिए विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर सामान की मांग की गई है। कुछ तकनीकी दिक्कत के कारण बैटरियां डिपों की वर्कशॉप में नहीं पहुंच रही है। जल्द ही इस समस्या का भी समाधान हो जाएगा।
राजकुमार, जीएम रोडवेज, कैथल।
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