अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आज जब बेटे की चाहत में लिंगानुपात का संकट गहरा रहा है, वहीं कई परिवार ऐसे हैं। जिन्होंने तीन-चार दशक पहले ही केवल बेटियों पैदा कीं, उन्हें पढ़ाया लिखाया और बेटियों ने ही इन परिवारों को सम्मान दिलवाया। ऐसा ही एक परिवार है सेवानिवृत्त डीएम एलएम नरुला का।
वर्ष 1984 में उस समय हरियाणा एग्रो में क्लर्क एलएम नरुला का विवाह 16 फरवरी को उस समय सरकारी स्कूल में लेक्चरर नियुक्त हो चुकीं जनक नरुला के साथ हुआ था। अगले ही साल उनके घर बेटी वनिका ने जन्म लिया। जिसका घर में खूब लाड़-प्यार हुआ। दादा दिलबाग राय शास्त्री का भी अपनी पोती से विशेष लगाव था। इसके बाद 1992 में दूसरी बेटी काव्या का जन्म हुआ। दोनों बेटियों के बाद नरुला दंपत्ति ने कोई संतान नहीं हुई। दोनों ने फैसला लिया कि दोनों बेटियों की ही अच्छी परवरिश की जाए। आज प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हो चुकीं जनक नरुला ने बताया कि उन्हें आज तक बेटों की कोई कमी महसूस नहीं हुईं। दोनों बेटियों की अच्छी पढ़ाई करवाई। बड़ी बेटी आज अमेरिका में सेटल है। बेटी ने उन्हें अमेरिका की सैर करवाई। उनके पति दो बार और वे स्वयं एक बार अमेरिका में एक-एक माह तक रह चुकी हैं। उनके ससुर या सास ने भी कभी उन पद इस बात का दबाव नहीं डाला कि बेटा पैदा हो। उनका दोनों पोतियों में विशेष लगाव रहा। छोटी बेटी आज सीए कर रही है। वे दोनों बेटियों से खुश हैं।
सेवानिवृत्त डीएम एलएम नरुला ने कहा कि उनकी बेटियां ही उनके बेटे हैं। वे उनकी बुढ़ापे की लाठी हैं। रही बात बेटों की तो बहुत से ऐसे बच्चे हैं, जो बेटों से भी ज्यादा मान-सम्मान उन्हें देते हैं। बेटियों को रक्षाबंधन जैसे पर्व पर राखी बांधने की परंपराओं को लेकर उनका कहना है कि चाचा, मामा के बेटे बड़े प्रेम से उन्हें तीज-त्यौहारों पर आमंत्रित करते हैं। उन्हें अभी तक कभी बेटे की कमी महसूस नहीं हुई।
पढ़ाई के सिलसिले में चंडीगढ़ रह रहीं नरुला परिवार की छोटी बेटी काव्या बुधवार को ही घर पहुंची थीं। काव्या ने कहा कि उन्हें अपने परिवार से प्रेम मिला और आज तक कभी लड़की होने के नाते उनके साथ भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने जो पढ़ना चाहा, मम्मी-पापा ने वही पढ़ाई करवाई। सभी सुख-सुविधाएं दीं। वे आज सीए कर रही हैं। शीघ्र ही कोर्स पूरा हो जाएगा। इसलिए समाज से अपील है कि बेटियों को अवसर दें, उन्हें मौका मिले तो वे बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं।
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दो बेटियों के माता-पिता सेवानिवृत्त डीएम एग्रो व स्कूल की प्रिंसिपल को कभी महसूस नहीं हुई बेटे की कमी
फोटो संख्या-16 व 28