‘मामूली मानदेय देकर आशाओं को शोषण कर रही है सरकार’
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आशा वर्कर्स यूनियन द्वारा जिला अस्पताल में विभिन्न मांगों के समर्थन में दिया गया धरना सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। सोमवार को धरने की अध्यक्षता जिला उप प्रधान सुदेश ने की। इस मौके पर ब्लाक राजौंद व कौल की सैकड़ों आशा वर्करों ने धरने में भाग लिया।
आशाओं को संबोधित करते हुए जिला प्रधान संतोष ब्राह्मणी वाला ने बताया कि तेलंगाना में आशाओं को 6 हजार रुपये, गुजरात में 4500 रुपये, केरल में 7500 रुपये वेतन मिलता है। हम एनएचएम के तहत सारी सेवाओं समेत जच्चा बच्चा टीकाकरण नसबंदी पोलियो का काम आशा वर्कर करती हैं। लेकिन एक जनवरी के बाद केन्द्र सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये घोषित करने के बाद भी आशाओं को मामूली मानदेय देकर शोषण किया जा रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार ने 3 साल के कार्यकाल में 22 हजार आशाओं के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोत्तरी नहीं की है। जबकि बाकी सभी एनएचएम कर्मचारियों के वेतन में हरियाणा सरकार बढ़ोत्तरी कर चुकी है। लेकिन आशाओं की कोई सुध नही ली। अब हम इस बेगारी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी। आशा वर्करों ने सरकार से पक्का कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू करने, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने, एनएचएम का बजट बढाने, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने जैसी मांगों को पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मांगे पूरी नहीं की तो 27 जनवरी से सारी आशा वर्कर हड़ताल पर चली जाएंगी व 30 जनवरी के जेल भरो आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भाग लेंगी। धरने को सीटू के जिला उप प्रधान जसपाल सिंह, आंगनबाड़ी वर्करज एवं हेल्पर्स यूनियन की महासचिव शकुंतला, सीटू जिला सचिव अशोक शर्मा आशा वर्कर नेत्री बाला, मनीषा, बाली, कविता, ऊषा, रेनू, नीतू, शिमला व प्रवीना ने भी संबोधित किया।
जिला अस्पताल में दिया गया धरना पांचवें दिन भी रहा जारी
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