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न तो बेड बढ़े और न ही स्टाफ, सुविधाओं के अभाव में कराह रहे मरीज

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न तो बेड बढ़े और न ही स्टाफ, सुविधाओं के अभाव में कराह रहे मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में मरीज कराह रहे हैं। अस्पताल को 200 बेड का बनाने के लिए दो माह पहले सीएमओ कार्यालय को पुराने अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन अस्पताल में सुविधाएं बढ़ने का नाम नहीं ले रही। यहां अभी भी तीसरी मंजिल खाली पड़ी हुई है। न तो बेड ही बढ़े और न ही स्टाफ। सुविधाओं के इंतजार में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

100 बेडों के अस्पताल में नहीं हैं सुविधाएं : जिला स्तरीय अस्पताल में पिछले कई सालों से ओपीडी करीब 1000 से अधिक चल रही है। इसमें डॉक्टरों की कमी होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतें आती हैं। सबसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ही करीब एक घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए लंबी लाइन तो बाद में टेस्ट के लिए लाइनों में लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद दवाओं के लिए लंबी लाइनों मेें पूरा दिन खराब हो जाता है। वहीं डॉक्टरों की कमी के चलते भी मरीज भटकते रहते हैं।
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स्टाफ बढ़ने का हो रहा है इंतजार : जिला अस्पताल में स्टाफ बढ़ने का इंतजार हो रहा है। इस समय अस्पताल में 20 डॉक्टर हैं, जिसमें से 13 कार्यरत हैं। वहीं 30 स्टाफ नर्स हैं। जबकि 200 बेड के अस्पताल में 44 चिकित्सकों व 60 स्टाफ नर्सों की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने किया था एलान : मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने पहले दौरे के दौरान कैथल अस्पताल को अपग्रेड करने का एलान किया था। इसके बावजूद इस दिशा में काम नहीं हो पाया।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1400 से 1600 ओपीडी : जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1400 से 1600 ओपीडी है। अस्पताल में सुविधाएं न मिलने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन होने वाली अधिक ओपीडी के कारण मरीजों का घंटों तक लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है।

अस्पताल में है अव्यवस्थाओं का माहौल : डीसी सुनीता वर्मा ने करीब एक माह पहले सरकारी अस्पताल का दौरा कर अस्पताल की खामियों का जांचा था। लेकिन अभी तक यह खामियां ज्यों की त्यों है। अस्पताल की तीसरी मंजिल के कमरों के गेट टूटे और इसके अंदर गंदगी का आलम है। जिसमें मच्छर पनप रहे है। इसके साथ ही स्टोर में टूटा हुआ फर्नीचर पड़ा है और अन्य स्थान पर भी यह ही हालात है। जहां मरीजों के लिए बैठने वाली कुर्सियां टूटी हुई ऐसे ही रखी हुई है। जो अस्पताल में अव्यवस्थाओं के माहौल को दर्शाता है।
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क्या कहना है सीएमओ का :
बेड की कोई कमी नहीं है। धीरे धीरे इस पर कार्य हो रहा है। अस्पताल में स्टाफ की कमी प्रदेश के अधिकतर जिलों में है। इस पर आला अधिकारियों के स्तर पर कार्रवाई चल रही है। जल्द ही स्टाफ की समस्या का समाधान होने का अनुमान है। जिसके बाद मरीजों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी।
अशोक चौधरी, सीएमओ, कैथल
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