संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु वाईके बहल को देखरेख में न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई। इसमें सुलह-समझौते के आधार पर 12,839 मामलों का निपटारा किया गया। साथ ही लोगों को प्रेरित किया कि लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों को निपटा कर लोक अदालत का फायदा उठाएं।
प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रितू ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 17 हजार 22 लंबित मामलों को रखा गया था, जिसमें से 12 हजार 839 मामलों का निपटारा किया। कुल 13 करोड़ 38 लाख 82 हजार 161 रुपये की राशि के विभिन्न अपराधिक, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम से संबंधित विवाद मामले, राजस्व मामले अन्य मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक यादव, सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) अमन इंद्र सिंह, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) रेखा चौधरी, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) संदीप कौर, राजविंद्र सिंह सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) गुहला डिविजन की बेंच गठित की थी।
बताया कि लोक अदालत में मामलों (विवादों) का निपटारा पक्षकारों की पारस्पारिक सहमति से किया जाता है। इसमें न किसी पक्षकार की जीत होती न हार। दोनों पक्षों में पुन: स्नेह का भाव उत्पन्न हो जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि यह शीघ्र व सस्ते न्याय का स्रोत है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि इसमें कोई न्यायालय शुल्क नहीं है और यदि न्यायालय शुल्क का भुगतान पहले ही कर दिया गया है तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर इसे वापिस कर दिया जाता है। लोक अदालत में मामले का निपटारा तुरंत हो जाता है और सभी को न्याय आसानी से मिल जाता है।