कैथल। सहकारी चीनी मिल का विवाद से नाता नहीं टूट रहा है। पिछले साल चिप घोटाले, किसानों का ज्यादा गन्ना तोलने जैसे विवादों के बीच अब अधिकारियों को किसानों के सवालों का जवाब देते नहीं बन रहा। सवाल सीधा सा है कि मिल में इस सीजन में किसानों को पर्ची देने के लिए सरकार का जो ऑनलाइन कैलेंडर सिस्टम है, उसे ध्वस्त क्यों और किसकी अनुमति से किया गया? अधिकारी किसानों के कल्याण की बात कहकर टाल-मटोल जरूर कर रहे हैं, लेकिन यदि मामले की जांच हो तो सच्चाई कुछ और ही सामने आ सकती है।
क्या है पर्ची सिस्टम : गन्ने का पेराई सत्र शुरू होने के साथ ही मिल क्षेत्र मेें आने वाले गन्ना किसानों को उनके रकबे के हिसाब से पर्ची सिस्टम तय होता है। जिसमें किसानों को प्रतिदिन की पर्चियों की संख्या तय होती हैं। ऑनलाइन सिस्टम को किसान घर बैठे भी देख सकता है। लेकिन किसानों ने बताया कि करीब 4 अप्रैल के बाद से मिल की ऑनलाइन सेवा को करीब-करीब बंद कर दिया गया। किसानों के पास ऑनलाइन संदेश पहुंचना बंद हो गए। ताकि किसानों को पता न चले कि कितनी पर्चियां काटी जा रही हैं। इसी बीच यह भी बात सामने आई कि किसानों को ऑनलाइन दिखाने के लिए उदाहरण के लिए एक दिन में 17 हजार पर्चियां काटी गई हैं। जबकि वास्तविक स्थिति में ये पर्चियां 18 हजार काट दी गईं। करीब 1 हजार पर्चियों की इस गड़बड़ी पर अब अधिकारी लीपापोती में लगे हुए हैं।
सूचना मिलने पर एमडी से मिले किसान : किसान नेता गुल्तान नैना ने बताया कि मिल में पता चला था कि सरकार के द्वारा ऑनलाइन सिस्टम बनाने के बावजूद पर्ची सिस्टम को ध्वस्त कर दिया गया है। जिस पर एमडी से मिलकर बात रखी गई तो पता चला कि किसानों को ऑनलाइन दिखाने के लिए कैलेंडर में कुछ और पर्चियां बताई जा रही हैं। जबकि पर्दे के पीछे पर्चियों की कुछ और ही एडजस्टमेंट की जा रही है। अपने चहेते किसानों को अधिकारी पर्चियां बांट रहे हैं। ये पर्चियां निशुल्क या सौगात हैं या फिर इनके लिए अंडर द टेबल कुछ नजराना भी जा रहा है। यह जांच का विषय है। जबकि मूढा किस्म का गन्ना, जो आज तक अप्रैल तक नहीं बचा, इस बार काफी मात्रा में बचा हुआ है। इस पूरे मामले में एमडी से मिलकर जवाब मांगा गया, अधिकारी एमडी के पूछने पर इस संबंध में जवाब नहीं दे पाए। उनके साथ किसान महेंद्र फतेहपुर, पाला राम क्योड़क, विक्रम क्योड़क, महावीर धौंस, सुनील नैना, बलिंद्र फतेहपुर भी मौजूद थे।
इन आरोपों पर गन्ना विकास अधिकारी रामपाल ने कहा कि कैलेंडर सिस्टम में जो भी तब्दीली की गई है, वह अधिकारियों की जानकारी में है। यह फैसला किसानों के हित में लिया गया है। उदाहरण के लिए यदि किसी किसान के पास गन्ना नहीं बचा है और उसकी पर्ची बची हुई है। इस पर्ची को उस किसान के लिए प्रयोग किया गया है, जिस किसान की पर्ची खत्म हो गई और उत्पादन ज्यादा होने के कारण उसके पास गन्ना बचा हुआ है। ऑनलाइन सिस्टम जारी है। इसे किसान घर बैठकर देख सकते हैं कि यार्ड में कितनी ट्राली खड़ी हैं। ऐसे करीब 167 किसान थे, जिनके गन्ने लिए जा रहे हैं। कैलेंडर में तब्दीली करने की कैन मैनेजर को पावर है। मिल में 30 अप्रैल तक गन्ने की पेराई चल रही है। यदि इसके बावजूद भी गन्ना बचता है तो उसे भी लिया जाएगा। चाहे मिल को एक या दो दिन अतिरिक्त चलाना पड़े। 20 अप्रैल तक चीनी के उत्पादन में कमी नहीं आती। मई माह में रिकवरी दर घट जाती है।