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आशा वर्कर्स की मांगें पूरी ना होने पर दो दिन की हड़ताल

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आशा वर्कर्स की मांगें पूरी ना होने पर दो दिन की हड़ताल
गांवों में गर्भवती महिलाओं की मदद, टीकाकरण सहित अन्य कार्य नहीं करेंगी दो दिन तक
लघु सचिवालय में दिया धरना, सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
फोटो संख्या-5
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आशा वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगें पूरी ना होने पर फिर से दो दिन की हड़ताल शुरू कर दी। वर्कर्स ने गर्भवती महिलाओं की मदद, टीकाकरण सहित अन्य कार्य छोड़कर लघु सचिवालय में धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान संतोष ब्राहमणी वाला ने किया। मंच संचालन सुदेश फरियाबाद ने किया। उन्होंने बताया कि जब तक हमारे एक फरवरी के हुए समझौते का नोटिफिकेशन लागू नहीं करते। उनके खाते में फरवरी से अब तक का मानदेय नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हरियाणा सरकार जो वादा खिलाफी कर रही है। उसका पुरजोर विरोध करते हैं। गुहला प्रधान चरणजीत ने बताया कि संघर्ष यूं ही जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आशा वर्कर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर है। जिला सचिव सरबजीत ने बताया कि जब तक हमें हमारे समझौते के अनुसार नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाता तब तक कोई भी आशा गांव में कार्य नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ तो हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी। इस मौके पर आशा के जिला प्रभारी जसपाल सिंह, सीटू जिला सचिव अशोक शर्मा, सीटू जिला प्रधान सत्यवान, ऊषा रानी, मोनू, सुमन, राम देवी, मीना, हरजीत, नवजीत, रेखा, कविता, शीला, दुर्गा, राजबाला मौजूद रहे।

ये काम नहीं करेंगी वर्कर्स:-
आशा वर्करों की दो दिन की हड़ताल के कारण डिलिवरी, टीकाकरण, एएनसी चेकअप, एचबीपीएनसी कार्ड, कुपोषित बच्चों को रेफर करना, बर्थ व डेथ की सूचना देना व प्रमाण बनवाना, फैमिली प्लानिंग जैसे कार्य नहीं करेंगी।
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ये हैं मुख्य मांगें
1. आशा को मिलने वाले फिक्स वेतन एक हजार रुपये में तीन हजार रुपये की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी करने का वादा किया था। इसलिए प्रत्येक आशा को अब चार हजार रुपये प्रतिमाह फिक्स मिलेंगे।
2. संस्थागत डिलिवरी, टीकाकरण, एएनसी, एचबीपीएनसी, फैमिली प्लानिंग/ बच्चों में गेप आदि में प्रोत्साहन राशियों में बढ़ोत्तरी की बात मानी गई।
3 आशा वर्कर की दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में तीन लाख मुआवजा जो एनएचएम कर्मियों को दिया जा रहा है। वही देने की बात स्वीकार की गई थी।
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