संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आठ महीने पहले भेजी गई 48 खस्ताहाल बसों के झटके से अभी कैथल डिपो उबरा भी नहीं था कि अब 12 और खराब बसें कैथल डिपो को भेज दी गई हैं। इस बार ये बीएस-4 तकनीक की बसें झज्जर या भिवानी नहीं, बल्कि पलवल जिले से आई हैं। इनकी जगह पर पलवल डिपो को बीएस-6 तकनीक की नई बसें दी गई हैं।
पहले से ही कैथल डिपो खराब बसों की समस्या से जूझ रहा है। अब इन बसों के आने से स्थिति और बिगड़ गई है। यात्रियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि ये बसें अक्सर बीच रास्ते में ही खराब होकर रुक जाती हैं, जिससे सफर लंबा और कष्टप्रद हो जाता है।
वर्ष 2024 में सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर कैथल डिपो से बीएस-6 तकनीक की 78 बसें एनसीआर क्षेत्र के लिए भेज दी थीं। बदले में मिलीं बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक की 48 पुरानी बसें, जिनकी मरम्मत में एक से डेढ़ महीना लग गया था।
कैथल डिपो में वर्ष 2023 व 2024 में करीब 10 साल के अंतराल के बाद यह बीएस-6 तकनीक की करीब 90 बसें आई थी। इसके करीब एक साल बाद ही इन बसों को एनसीआर क्षेत्र में आने वाले जिलों में सरकार के आदेशों पर भेजा गया था। ऐसे में अभी डिपो में करीब 32 बसें ही बीएस-छह तकनीक की रह गई हैं।
रोडवेज यूनियन में आक्रोश ः रोडवेज कर्मचारियों ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। कर्मचारी यूनियन के नेता मनजीत सिंह ने कहा कि बीएस-6 तकनीक की बसों के बदले बीएस-3 और बीएस-4 की पुरानी बसें भेजना सीधे-सीधे यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है। ऐसी बसों को लंबे रूट पर चलाना भी संभव नहीं है।
वहीं, वर्कशॉप में कार्यरत बलजीत सिंह ने बताया कि आईं बसों की हालत बेहद खराब है। यहां तक कि उनकी बॉडी तक जर्जर है। इन्हें ठीक करने में लंबा वक्त लगेगा और तब तक यात्रियों को असुविधा झेलनी होगी। ड्राइवर और कर्मचारी नेता कृष्ण किच्छाना ने भी बीएस-3 व 4 की बसों को भेजने का पुरजोर विरोध किया।
सरकार के निर्देशानुसार एनसीआर क्षेत्र में बीएस-6 तकनीक की बसों के संचालन हेतु कमेटी बनी है। उसी के आदेशों पर यह अदला-बदली की जा रही है। चूंकि कैथल जिला एनसीआर में नहीं आता, इसलिए यहां से बीएस-6 बसें हटाकर अन्य जिलों को दी गई हैं। -अनिल चोपड़ा, वर्कशॉप प्रबंधक, कैथल डिपो
भेजी गईं बस (2024-25)
झज्जर
39 बसें
भिवानी
07 बसें
जींद
07 बसें
पलवल
08 बसें