कैथल। कैथल रोडवेज डिपो का बस बेड़ा एक बार फिर घट गया है। शुक्रवार को 12 रोडवेज बसें कंडम घोषित कर दी गईं। इन बसों ने अपने निर्धारित 10 साल की वैधता पूरी कर ली थी। अब डिपो के पास केवल 187 बसें (164 रोडवेज व 23 लीज) बची हैं।
इन बसों के बंद होने से खासकर लोकल और स्कूल-कॉलेज रूटों पर सबसे ज्यादा असर दिखाई देगा। रोजाना इन रूटों पर आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
डिपो को वर्तमान यात्री भार और जनसंख्या के हिसाब से 66 नई बसों की जरूरत है। अभी डिपो में कुल 250 बसों की आवश्यकता है, लेकिन संख्या घटकर 187 रह गई है। पहले डिपो के पास खुद की 176 और लीज सहित 199 बसें थीं।
नई बसें नहीं, पुरानी ही बोझ
जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में डिपो को 121 नई बसें मिली थीं, लेकिन इनमें से 48 बीएस-6 बसें पानीपत, भिवानी, पलवल, झज्जर आदि डिपो में भेज दी गईं।
बदले में कैथल डिपो को पुरानी व जर्जर बसें मिलीं। इन बसों को वर्कशॉप में मरम्मत कर किसी तरह यात्रियों की सुविधा के लिए चलाया जा रहा है, लेकिन कई बार ये बसें बीच रास्ते खराब हो जाती हैं।
वर्तमान में डिपो में 73 बसें नई स्थिति में बची हैं, जो अगले दो वर्षों में अपनी वैधता पूरी कर लेंगी।
ये कमेटी करती है बसों को कंडम
10 वर्ष पूरे कर चुकी बसों का निरीक्षण मुख्यालय द्वारा गठित तकनीकी टीम करती है। टीम की रिपोर्ट पर बसों को कंडम घोषित किया जाता है और फिर उन्हें रूट से हटा दिया जाता है।
बता दें, कैथल डिपो की पुरानी बसों का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है, लेकिन उसके बाद भी बसों की कमी दूर नहीं हुई है।
इन रूटों पर बढ़ेगी परेशानी
बसों की संख्या घटने से कुरुक्षेत्र, करनाल, असंध, जींद, गुहला-चीका और नरवाना रूटों पर यात्रा करना कठिन हो सकता है। इन रूटों पर पहले इन्हीं बसों का संचालन किया जा रहा था।
डिपो में बची बसें
बस का प्रकार
संख्या
बीएस-3
52
बीएस-4
47
बीएस-6
65
डिपो की इन बसों से रोजाना करीब 20 हजार यात्री सफर करते हैं, जिससे विभाग की आमदनी 16 से 18 लाख रुपये तक रहती है।
कर्मचारी बोले = सरकार खरीदे नई बसें
रोडवेज कर्मचारी नेता संदीप ने कहा कि डिपो में 250 बसें शामिल की जानी चाहिए। पुरानी बसें बीच रास्ते खराब हो जाती हैं, जिससे यात्री, चालक और परिचालक सभी को दिक्कत होती है। सरकार को तुरंत नई बसें खरीदनी चाहिए।
यात्रियों की मांग -जल्द भेजी जाएं नई बसें
मनोज, राजेंद्र, राजेश और रामकुमार जैसे यात्रियों ने कहा कि कैथल डिपो की कई बसें अब खटारा हो चुकी हैं। कई बार यात्रा बीच में ही रुक जाती है। सरकार को चाहिए कि पुरानी बसों को कंडम कर नई बसें भेजे, ताकि यात्रियों की परेशानी कम हो।
विभाग का पक्ष
अनिल, वर्कशॉप मैनेजर (रोडवेज कैथल) ने बताया कि कैथल डिपो से 12 बसें कंडम की गई हैं। जल्द ही नई बसें मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।