शहर में एकमात्र रैन बसेरा, वह भी शहर से काफी दूर
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में रैन बसेरे के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। शहर के काफी बाहर स्थित सामुदायिक केंद्र को रैन बसेरे का नाम दिया गया है। जहां तक शायद ही कोई जरूरतमंद पहुंचे। बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के नजदीक कोई भी रैन बसेरा नहीं है। जहां पर लोग सर्दी के मौसम में रात काट सकें।
सर्दियों के मौसम में रैन बसेरे की अधिक जरूरत पड़ती है। ऐसे में रैन बसेरा शहर से बाहर होने के कारण लोगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ रैन बसेरे की भी हालत खस्ता है। यहां बने कमरे में मिट्टी भरी पड़ी है। बाथरूम, पानी की टोटी टूट-फूट का शिकार हैं। नगर परिषद के कर्मचारी कभी-कभी वहां पर सफाई करने के लिए जाते हैं।
रैन बसेरे के चौकीदार रतन ने बताया कि रैन बसेरे के लिए 13 बिस्तर हैं। किसी को अगर रैन बसेरे में ठहरना है तो वह आधार कार्ड व कागजात चेक करवाकर ठहर सकता है। हालांकि पिछले कई महीने से कोई भी व्यक्ति यहां नहीं आया है।
कड़ाके की सर्दी में सड़क के बीच में सो रहे हैं लोग : रैन बसेरा शहर के बीच में न होने के कारण कई गरीब लोग सड़कों के बीच में सो रहे हैं। पिहोवा चौक पर तीन से चार व्यक्ति प्रतिदिन दुकानों के आगे बने जगहों पर सोते हैं। अगर रैन बसेरा नजदीक हो तो वह रैन बसेेरे में रात को आराम से सो सकते हैं।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि इस बारे में अधिकारियों से जानकारी हासिल की जाएगी।
बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के नजदीक नहीं है कोई रैन बसेरा
सर्दियां अधिक होने के कारण पड़ेगी रैन बसेरे की जरूरत
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