आप रहें अलर्ट क्योंकि सिटी में लगे सीसीटीवी कैमरे हैं खराब
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कोहरे का सीजन चोरों के लिए काफी लाभदायक साबित होने जा रहा है। क्योंकि शहर में चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की हालत खस्ता है। आज तक इनके लिए कंट्रोल रूम तो क्या कैमरे चालू हालत में हैं या नहीं, इस बात की जांच के लिए तंत्र विकसित नहीं हो पाया है। गाहे-बगाहे पुलिस को इन कैमरों की रिकॉर्डिंग की जरूरत होती है। लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात। ऐसे में आपको अपनी संपत्ति के लिए खुद अलर्ट होना होगा। ताकि चोर कोहरे व सर्दी के मौसम में कहीं मौका पाकर आपके सामान को ही टारगेट न बना लें।
सर्दी के मौसम में अक्सर चोरी की वारदातों में इजाफा देखने को मिलता है। इस बार भी यह सीजन शुरू हो चुका है। विशेष रूप से कोहरे के मौसम में चोर वारदातों को अंजाम देते हैं। दिन में मोटरसाइकिल चोरी के मामलों में पुलिस की असफलता जग जाहिर है। ऐसे में सर्दी में रात के समय में चोरी की वारदातें बढ़ने की पुरजोर संभावनाएं हैं।
अगस्त के बाद से नहीं संभाले गए कैमरे : नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार तीन माह पूर्व कैमरे चलवाए गए थे। अब वे किस हालत में हैं, इस बात की जानकारी किसी के पास नहीं हैं। कैमरों की देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारी का कहना है कि कैमरों को चेक करवाने के लिए नगर परिषद के एमई व एक्सईएन के आदेश आएंगे तभी शहर के कैमरे चेक होंगे। उनकी संज्ञान में नहीं है कि शहर के कैमरे चल रहे हैं या नहीं।
लाखों रुपये हो चुके हैं खर्च, आज तक नहीं मिल रही किसी तरह की मदद : शहर में करीब 32 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिन पर लगभग 18 लाख रुपये का खर्च आ चुका है। लेकिन अभी तक शहर के कैमरे पूरी तरह से वर्किंग में नहीं आए हैं। बड़ी वारदात के बाद जब इनकी जांच की जाती है तो कैमरे या तो बंद मिलते हैं, या फिर रिकॉर्डर नहीं होता। कुछ दिन पहले पार्षद विनोद सोनी पर हुए हमले व महिला के गले से सोने की चेन छीनने सहित अनेक मामले आए हैं। करीब तीन साल पहले अनाज मंडी में एक युवक के सरेआम हुई हत्या के मामले में भी पुलिस बाद में केवल सीसीटीवी कैमरे खंगालती रही। जिसमें अधिकतर कैमरे खराब मिले।
हत्या के मामले में मदद की जरूरत थी, नहीं मिला कोई सुराग : एसएचओ सिटी रमेश चंद का कहना है कि पार्क में हुई हत्या के मामले में सरकारी कैमरे की रिकॉर्डिंग की जरूरत पड़ी थी, लेकिन कैमरा खराब मिला। कोई बड़ी मदद अभी तक नहीं मिल पाई है। चोरी की वारदातों को रोकने के लिए शहर में गश्त बढ़ाई गई है।
सरकारी की बजाए प्राइवेट कैमरों से मिल जाती है मदद : सिविल लाइन थाना प्रभारी जसवंत सिंह का कहना है कि सरकारी की बजाए दुकानों या प्रतिष्ठानों पर लगे प्राइवेट कैमरों से मदद मिल जाती है। सरकारी में क्वालिटी की भी समस्या रहती है।
नगर परिषद के सीसीटीवी कैमरे के रेखदेख करने वाले सतीश ने बताया कि उन्होंने अगस्त महीने में कैमरे लगाए थे। वह ठीक थे। इसके बाद अगर एमई या एक्सईएन उनको चेक करने के लिए कहते हैं तो चेक करेंगे। कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं चेक करने के बाद ही बताया जा सकता है।
नगर परिषद के कार्यकारी चेयरमैन डा. पवन थरेजा ने बताया कि शहर के लगे सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी ली जाएगी। अगर कोई कैमरा खराब है तो उनको ठीक करवाने के निर्देश दिए जाएंगे। शहर के सीसीटीवी कैमरे ठीक होने जरूरी है। पुलिस से मांग की जाएगी कि रात्रि के समय चोरी की वारदातों को रोकने के लिए गश्त बढ़ाई जाए।
पुलिस को नहीं मिल रही सीसीटीवी कैमरों से आवश्यक मदद, वारदात होने के बाद ही याद आते है सीसीटीवी कैमरे
नगर परिषद के एमई या एक्सईएन कहेंगे तो चेक होंगे कैमरे
कई बड़ी वारदातों में पड़ती है कैमरों की रिकॉर्डिंग की आवश्यकता
फोटो नंबर- 10