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बिगड़े हुए हालात न दे, बैचेनी की रात न दे, डूब न जाए शहर मेरा, इतनी भी बरसात न दे

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बिगड़े हुए हालात न दे, बेचैनी की रात न दे, डूब न जाए शहर मेरा, इतनी भी बरसात न दे
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी सभा के प्रधान प्रो. एएल मदान की अध्यक्षता में आरकेएसडी कॉलेज में हुई। गोष्ठी में राज कुमार मदान मुख्यातिथि के रूप में मौजूद रहे। मंच संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी में डॉ. तेजिंद्र की पंक्तियां बिगड़े हुए हालात न दे, बेचैनी की रात न दे, डूब न जाए शहर मेरा, इतनी भी बरसात न दे, ने समां बांध दिया।
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बाल कवि युवराज ने बाल कविता सुनाते हुए कहा कि सूरज की किरणें आती है, सारी कलियां मिल जाती है। माता-पिता को सम्मान देने की बात सतीश शर्मा ने कहा कि इनके चरणों मे चारों धाम, चरण छू बेड़ा पार कर। दिनेश बंसल की गजल में कहा मुस्कुराहट भले होठों पे सजा रखी है। बस्ती ए दिल में पहले भी वीरानी है। रामफल गौड़ की इन पंक्तियों में देखिए-बेशक काट करै सै दुनियां, पदवी नै बिसरावै सै। बिन नेता की दुनिया में किसने रास्ता पावे सै। आत्म हत्या को लेकर श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि कर्ज में डूब कर किसानों ने मौत को गले लगाया, होकर मजबूर उन्होंने आंदोलन चलाया। अब क्या होना शेष है यह मेरा भारत देश है। गृहस्थ आश्रम को मीठा टोटा बताते हुए डा. चतुर्भज बंसल की इन पंक्तियों में देखिए- यू गृहस्थ आश्रम भी कुछ नी, कोरा मिठा टोटा सै, इनसा नहीं कोई जिसकै, नही दुख माडा मौटा सै। डा. जगदीप ने हरियाणा का गान किया। महेंद्र पाल, रिसाल जांगड़ा, डा. हरेश चंद्र झंडई, कमलेश शर्मा, राज कुमारी मदान ने भी विचार व्यक्त किए। प्रो. अमृत लाल मदान के कविता और अध्यक्षीय टिप्पणी के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। गोष्ठी में स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, उमेश कांता, आरपी गुलाटी, राजेश सिंहमार, डा अशोक अन्नी व सतबीर जागलान ने भी कविताएं प्रस्तुत कीं।
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