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स्वच्छता सर्वेक्षण में आड़े आ रही है मोबाइल की कमी

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स्वच्छता सर्वेक्षण में आड़े आ रही है मोबाइल की कमी
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एंड्रॉयड फोन में अपलोड की जाती है फोटो, सफाई कर्मचारियों के पास नहीं हैं फोन
दरोगा देता है जानकारी, इसके बाद संबंधित लोकेशन पहुंचते हैं सफाई कर्मचारी
फोटो नंबर-07
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वच्छ मैप एप के तहत आने वाली शिकायतों के निपटारे में एंड्रॉयड मोबाइल की कमी आड़े आ रही है। जिससे एप पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्वच्छ मैप एप को प्रयोग करने वाले लोगों की ओर से एंड्रॉयड मोबाइल के माध्यम से ही फोटो को एप में अपलोड किया जाता है। जिसके बाद उस अपलोड हुई फोटो की लोकेशन नगर परिषद के कार्यालय में जाती है। जिसके बाद मुख्य सफाई निरीक्षक दरोगा को फोटो व लोकेशन भेजता है। तब दरोगा अपने अधीन आने वाले क्षेत्र के तहत सफाई कर्मचारी को वहां भेजता है। लेकिन इस प्रक्रिया में सफाई करने वाले कर्मचारी के पास एंड्रॉयड मोबाइल न होने पर 30 मिनट की बजाय तीन से चार घंटे का समय लगता है। जबकि यदि सीधा सफाई करने वाले कर्मचारी के पास एंड्रॉयड मोबाइल हो तो शिकायतों को समाधान केवल 15 से 30 मिनट में ही हो जाएगा।
सफाई कर्मचारियों के पास नहीं हैं एंड्रॉयड फोन : बता दें शहर के सभी 31 वार्डों में कुल 430 कर्मचारी सफाई के कार्य पर लगाए गए है। जिसमें से करीब 20 दरोगा शामिल है। इन 20 दरोगा को छोड़कर अन्य किसी भी सफाई कर्मचारी के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है।
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अधिकतर सफाई कर्मचारियों नहीं आता एंड्रायड मोबाइल चलाना : वहीं मुख्य सफाई निरीक्षक मोहन भारद्वाज ने बताया कि नप में तैनात अधिकतर सफाई कर्मचारियों को एंड्रॉयड मोबाइल चलाना नहीं आता। जिस कारण उनके पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है। वहीं स्वच्छ मैप एप पर आने वाली सभी समस्याओं का समय पर निपटारा कर दिया जाता है।
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