जिला अस्पताल में गड़बड़ी की शिकायत सीएम विंडो पर
- वर्ष 2011-12 में बिना अनुमति के फर्जी बिलों 70.88 लाख की गड़बड़ी?
कहा-ऑडिट रिपोर्ट में हुआ था मामले का खुलासा, अभी तक विभाग ने क्या कार्रवाई की?
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है। अब करीब 70 लाख 88 हजार रुपये की गड़बड़ी के मामले में सीएम विंडो पर शिकायत करके कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2011-12 में सरकार से बिना अनुमति के जिला अस्पताल में एक एजेंसी को ठेका देकर फर्जी कागजात के माध्यम से यह राशि खर्च की गई है। जिसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सीएम विंडो में दी शिकायत में रणदीप आर्य फरल ने कहा कि वर्ष 2011-12 में आउटसोर्सिंग स्कीम के तहत बिना अनुमति के लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। ठेकेदार से मिलीभगत करके 70.88 लाख रुपये के फर्जी बिल पास किए गए। जब ऑडिट टीम ने जांच की तो यह बात सामने आई। इस मामले में एक माह में जवाब मांगा गया था। शिकायत में कहा गया है कि विभाग के डायरेक्टर स्तर पर की गई मिलीभगत से फर्जी पोस्ट फेक्टो स्वीकृति लेकर गोलमाल किया गया। किसी भी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए इस मामले में जांच कर फर्जी बिलों के माध्यम से निकलवाए गए पैसों को सरकार के खाते में वापस जमा करवाया जाए और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
रणदीप आर्य फरल ने कहा कि उन्हें सीएम विंडों पर की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार है।
दूसरी ओर अस्पताल सूत्रों ने बताया कि विभाग की जिलास्तरीय जांच में पाया गया था कि इस अवधि में ठेका 7000 वर्ग मीटर में साफ-सफाई के लिए एक एजेंसी को दिया गया था। जिसमें 84 कर्मचारियों की स्वीकृति थी। लेकिन कर्मचारी 115 रखे गए। एरिया बढ़ाकर 9157 वर्गमीटर कर दिया गया। जांच में पाया गया था कि कर्मचारियों व एरिया के बढ़ाने के लिए कोई दस्तावेज नहीं मिला था। न ही बढ़ाए हुए कर्मचारियों का अस्पताल मैटर्न द्वारा कोई रजिस्टर मेनटेन किया गया था। जांच में यह भी कहा गया था कि जुलाई 2011, अगस्त 2011,जनवरी 2012, जून 2012, अगस्त, सितंबर व नवंबर 2012 और जनवरी 2013 के बिल जिला अस्पताल के अधिकारियों से वेरिफाई करवाए गए थे।