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आठवीं तक बच्चों को फेल ना करने से कमजोर हो रही है देश के भविष्य की नींव

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आठवीं तक बच्चों को फेल न करने से कमजोर हो रही है देश के भविष्य की नींव
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-दस साल तक आठवीं तक के बच्चों को नहीं किया गया तो
-दो ब्लॉकों के 148 स्कूलों के 18000 बच्चों में से आधे बच्चों को अपनी कक्षा के अनुरूप ज्ञान नहीं
-बच्चों के बौद्धिक लेवल में सुधार के लिए 15 नवंबर तक का दिया गया लक्ष्य


नसीब सैनी
कैथल।
सरकार द्वारा पहली से आठवीं तक के बच्चों को फेल न करने की नीति के कारण बिना ज्ञान के भी बच्चे अगली कक्षाओं में बैठते जा रहे हैं। परिणाम यह हुआ कि उन्हें अपनी कक्षा की तो छोड़ दीजिए, अपनी से निचली कक्षा के प्रश्नों का भी ज्ञान नहीं हैं। कैथल के दो ब्लॉकों राजौंद व पूंडरी के करीब 148 स्कूलों में विभागीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि यहां लगभग 9000 बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप ज्ञान नहीं रखते। इसके लिए सक्षम नामक योजना पर दो माह पूर्व काम शुरू हुआ। इन स्कूलों के अध्यापकों को 15 नवंबर तक का समय दिया गया है, इसके बाद इन बच्चों की परीक्षा होगी। जिसमें फिर से उनका बौद्धिक लेवल जांचा जाएगा।
सरकार द्वारा करीब एक दशक पूर्व आठवीं तक के बच्चों को फेल न करने की नीति लागू की थी। नीति तो अभी भी लागू है। लेकिन करीब एक साल पहले सरकार ने विधिवत तौर पर परीक्षा लेने व बच्चों की बौद्धिक क्षमता जांचने की नीति लागू की। जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। प्रारंभिक तौर पर जिले के पूंडरी व राजौंद ब्लॉक के 148 स्कूलों के 18000 बच्चों के बौद्धिक लेवल की जांच की गई तो पता चला कि 50 प्रतिशत बच्चे भी अपनी कक्षा के अनुसार ज्ञान नहीं रखते।
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डीसी ने लगाई विशेष ड्यूटी : इतनी गंभीर स्थिति मिलने पर डीसी सुनीता वर्मा ने दो माह पूर्व सक्षम अभियान के तहत शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस स्थिति में सुधार की योजना पर काम किया। जिसके परिणाम भी सकारात्मक आते दिखाई दे रहे हैं।

ऐसे बढ़ाई जा रही है बच्चों की बौद्धिक क्षमता : इन 148 स्कूलों में जो बच्चा जिस कक्षा मेें है, उसके ज्ञान को उसकी कक्षा के अनुसार बढ़ाने के लिए अध्यापकों, मुख्य अध्यापकों, एबीआरसी स्तर पर ट्रेनिंग करवाई गई। इन बच्चों के लिए अतिरिक्त सिलेबस देकर अतिरिक्त कक्षाएं लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले सप्ताह राजौंद ब्लॉक की बैठक में अध्यापकों ने व्यक्तिगत तौर पर इस बात की पुष्टि की कि वे इन बच्चों के बौद्धिक स्तर को हर हाल में सुधार लेंगे।

15 नवंबर तक का दिया गया है टारगेट : डीसी के नेतृत्व में इन सभी स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों को 15 नवंबर तक बच्चों के बौद्धिक स्तर में बढ़ोत्तरी का टारगेट दिया गया है। इसके लिए अध्यापक अतिरिक्त सिलेबस, नए तौर-तरीकों से बच्चों के ज्ञान को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

राजौंद व पूंडरी के करीब 148 स्कूलों में सक्षम योजना के तहत बच्चों की बौद्धिक क्षमता में बढ़ोत्तरी के लिए 15 नवंबर तक का लक्ष्य दिया गया है। अध्यापकों में इस योजना को लेकर जोश है। वे खुद रुचि लेकर इसमें जुटे हुए हैं। 15 नवंबर के बाद इन बच्चों का फिर से टेस्ट लिया जाएगा। इसके लिए प्रश्न पत्र तैयार कर लिया गया है। ताकि पता चल सके कि इनके बौद्धिक स्तर में कितनी वृद्धि हुई। करीब 50 प्रतिशत बच्चों का बौद्धिक स्तर कम पाया गया था।
एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने कहा कि देश के भविष्य की नींव कमजोर न हो। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के लिए कहा गया है। उम्मीद है कि योजना के सकारात्मक परिणाम आएंगे।
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80 प्रतिशत बच्चों के बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का है 15 नवंबर तक लक्ष्य : डीईओ शमशेर सिंह सिरोही ने बताया कि 15 नवंबर तक 80 प्रतिशत बच्चों के बौद्धिक क्षमता में बढ़ोत्तरी का लक्ष्य है। इसके बाद जो बच्चे बच जाएंगे, उनके लर्निंग लेवल बढ़ाने के लिए भी काम होगा।
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