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कौल मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर एजेंसी व किसान आमने सामने

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ढांड। अनाज मंडी कौल में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर वेयर हाउस के अधिकारी और किसानों में ठन गई है। वेयर हाउस के अधिकारी कौल मंडी में गेहूं का एक भी दाना खरीदने को तैयार नहीं, जबकि किसान अपनी गेहूं को बेचने के लिए पिछले कई दिनों से मंडी में डेरा जमाए बैठे हैं। किसानों ने सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि एक साजिश के तहत उनकी गेहूं का एक भी दाना कौल मंडी में खरीदा नहीं गया है। जिससे अचानक हुई बरसात से उनकी गेहूं की फसल खुले आसमान के नीचे भीग कर खराब हो गई है।
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किसान अनंत राम, रणदीप, रामदिया, काला, प्रवीन, महेंद्र, शिव कुमार, गोपाल, राजबीर ने बताया कि जब सरकार ने गेहूं की फसल को मंडियों मेें खरीदना ही नहीं था तो उन्हें गेहूं की पैैदावार करने पर ही रोक लगा देनी चाहिए थी। जिससे उनको इतना भारी भरकम खर्च तो न करना पड़ता। सरकार द्वारा कौल में करोड़ों रुपये खर्च करके मंडी का निर्माण इसलिए करवाया गया था ताकि किसान अपनी फसल को यहां बेच सकें। लेकिन खरीद एजेंसी के अधिकारियों के तुगलकी फरमानों ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण मंडी में खुले आसमान के नीचे बारिश के कारण खराब हुई गेहूं का मुआवजा दिया जाए और तुरंत प्रभाव से मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करवाई जाए। अन्यथा किसान अपनी गेहूं की फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर होंगे।
उधर, मंडी आढ़तियों में भी इस बात को लेकर रोष है कि जब हर वर्ष सरकार द्वारा कौल मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद की जाती रही है तो इस बार भी उसी प्रकार से खरीद होनी चाहिए। यह तो किसानों के साथ सरासर अन्याय है।
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खरीद एजेंसी वेयर हाउस कौल के मैनेजर जगदीश ने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार कौल मंडी में गेहूं की खरीद करने की बजाए सोलूमाजरा स्थित अदानी एग्रो में की जाएगी। इसके लिए पहले से ही मंडी के आढ़तियों को सूचित किया जा चुका है। अधिकारी जैसा आदेश करेंगे उसका पालन किया जाएगा।
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