आरटीआई में हुए खुलासे पर एसडीओ की मुहर, 10 की बोतल के लिए पास किया गया था 30 रुपये का बिल
- 200 एमएल की 700 बोतलों के लिए 8 रुपये की दर्ज से पास किया गया था बिल
जबकि 200 एमएल की बोतल ही बाजार में नहीं है..
एसडीओ की जांच में जेई बिल पास करने का दोषी करार, ठेकेदार से रिकवरी के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा कोयल कॉम्पलैक्स में दिखाए गए एक कार्यक्रम में प्रयोग हुए पानी के विवादित बिलों के मामलों में बिल पास करने के लिए जेई को दोषी करार दिया गया है। साथ ही ठेकेदार से ज्यादा ली गई राशि को रिकवर करने के लिए कहा गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल रसूलपुर ने बताया कि उन्होंने विभाग से आरटीआई के माध्यम से यह सूचना हासिल की थी। जिसमें पता चला था कि विभाग ने एक कार्यक्रम के लिए 10 रुपये कीमत की पानी की बोतल को 30 रुपये में बिल दर्ज किया हुआ है। साथ ही 200 एमएल की बोतल के लिए 8 रुपये प्रति बोतल बिल में दर्ज किया गया है। जबकि बाजार में 200 एमएल की बोतल उस कंपनी की उपलब्ध ही नहीं है। इस मामले में डीसी ने जांच के आदेश जारी किए थे। इस कार्यक्रम में 200 एमएल की 700 बोतल प्रति बोतल 8 रुपये के हिसाब से व 500 एमएल की 30 बोतल 30 रुपये के हिसाब से खरीदी हुई दिखाई गई। इस बिल को जेई व एसडीओ ने भी पास कर दिया था।
डीसी के आदेश पर मामले की जांच हुई। इस मामले की जांच करते हुए एसडीओ प्रदीप कुमार ने अपनी रिपोर्ट आला अधिकारियों को सौंप दी है। एसडीओ ने बताया कि उनकी जांच में पाया गया है कि 10 रुपये कीमत वाली बोतल के रेट अधिक दर्ज किए गए। जबकि 200 एमएल की कोई बोतल संबंधित कंपनी की बाजार में नहीं है। जो है, वह 250 एमएल की है। इसलिए इस मामले में ठेकेदार ने जितनी भी अधिक राशि का क्लेम किया है, उससे यह राशि रिकवर की जाए। साथ ही जेई ने इस बिल को पास किया है तो वह भी दोषी है। जेई को ये रेट व बोतल देखी जानी चाहिए। जो नहीं देखी गई और बिल पास कर दिया गया।