70 हजार की मदद लेकर गांव कवारतन की महिलाओं ने फाइल कवर बनाने शुरू किए...
5 माह में बेच चुकी हैं 40 हजार फाइल कवर, ऋण चुकाया, प्रति माह 30 से 40 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहा है उन्नति फेडरेशन
एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं की सफलता की कहानी
अपने स्वयं सहायता समूह बनाकर गठित की अपनी फेडरेशन
एक दिन में बना देती हैं 2000 से लेकर 2500 तक फाइलें
फोटो नंबर-38
नसीब सैनी
कैथल। जब मन में कुछ करने का जज्बा हो तो चारों ओर से मदद के हाथ उठ जाते हैं। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के गठित स्वयं सहायता समूह में सहायता मिली तो गांव कवारतन की 14 महिलाओं के ग्रुप ने मिसाल कायम कर दी। मिसाल भी ऐसी कि पांच माह में 40000 फाइलों के कवर बेच चुकी हैं। अभी उनके पास 5 हजार का नया ऑर्डर है। हाथ से ये फाइल कवर तैयार करती हैं और सरकारी कार्यालयों सहित प्राइवेट संस्थानों में फाइल कवर के लिए खुद मार्केटिंग करती हैं।
गांव में गठित अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों से दो-दो सदस्य लेकर उन्नति ग्रुप फेडरेशन गठित किया गया। जिसमें से 14 सदस्यों ने फाइल कवर बनाने का प्रशिक्षण लिया। जुलाई 2018 में इन्होंने प्रशिक्षण के बाद हाथ से ही फाइल कवर बनाने का काम शुरू किया। इनके द्वारा तैयार की गई फाइल मशीनी फाइलों से सस्ती उपलब्ध है। इस कारण धंधा चल निकला और आज उन्होंने 40 हजार से अधिक फाइलें बेच दी हैं।
फाइल कवर बनाने वाले ग्रुप की लीडर रुबीना ने बताया कि उनके ग्रुप में बलजिंद्र, मनजीत कौर, हरप्रीत कौर, मीना, गुरदेवी, मीना, मनदीप कौर, रजविंद्र कौर, मनजीत सहित 14 सदस्य घर पर ही काम काज करते थे। फाइल बनाने के लिए ग्योंग में स्थित सेंटर से 10 दिन की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद एनआरएलएम के तहत बनी गांव की समिति से 70 हजार रुपये का ऋण लिया था। आज हर रोज 14 सदस्य करीब 2500 फाइलें बना देते हैं। शुक्रवार को ही डीसी कार्यालय से 5 हजार फाइलों का ऑर्डर मिला है। प्रत्येक सदस्य को प्रति माह सारे खर्च निकाल कर 2 हजार रुपये से अधिक की आमदनी होने लगी है। वे घर का काम करने के बाद समय निकाल कर यह काम कर रही हैं। कई बार देर रात तक भी काम होता है। अब प्रयास है कि फाइल कवर के साथ-साथ प्रिंटिंग प्रेस की मशीन लगाई जाए है। ताकि फाइल के साथ-साथ कोई और भी काम किया जा सके।
जिला योजना अधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि जिस तरह से फाइल कवर बनाने के काम को बढ़ावा मिला है। वह उत्साहित करने वाला है। इतनी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिलना सुखद एहसास है। इन महिलाओं की हर संभव मदद की जा रही है। यह ग्रुप अभी काफी कुछ कर सकता है। इसके साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं रेखा, कविता व हीना ने गांव में ही जैविक खाद का बिक्री केंद्र खोला है। जिन्होंने अपने ही गांव में करीब 156 किसानों को जैविक उत्पाद बेचे हैं।