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हड़ताल पर गए राइस मिलर्स, नहीं हो पाई धान की सरकारी खरीद

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हड़ताल पर गए राइस मिलर्स, नहीं हो पाई धान की सरकारी खरीद
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पहले दिन भटकते रहे किसान, मिलर्स को फोन करते रहे अधिकारी
मिलर्स ने जताई असमर्थता, कहा- मौजूदा हालात में नहीं कर पाएंगे खरीद
मंडियों में किसानों ने जताया रोष, दिन भर आश्वासन देते रहे अधिकारी
पीआर ग्रुप की होनी है सरकारी खरीद
फोटो संख्या-20 व 21
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। धान की खरीद के पहले दिन राइस मिलर्स की हड़ताल के कारण धान खरीद नहीं हो पाई। अधिकारी जहां नमी ज्यादा होने की बात कह रहे हैं, वहीं मिलर्स का कहना है कि सरकार के नए नियमों के कारण वे खरीद करने में असमर्थ हैं।
सोमवार से धान की सरकारी खरीद शुरू होनी थी। जिसमें पीआर ग्रुप की धान शामिल हैं। इसकी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जानी थी। किसान सुबह ही मंडियों में धान लेकर पहुंच गए। लेकिन कोई भी मिलर धान खरीद करने नहीं आया। जिस कारण किसान दिन भर बोली की बाट जोहते रहे। परेशान किसान मार्केट कमेटी सचिव से मिले और सचिव दलेल सिंह को अपना दुखड़ा सुनाया, परन्तु वह भी उनकी समस्या हल नही कर सका। सचिव से मिलने वाले किसानों में अमरीक चक्कू, बलकार खेड़ी, मुख्त्यार सिंह, जसपाल चक पाड़ला, इंद्र जीत नागल, श्रीपाल खेडी अनेक किसान उपस्थित थे।
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मिलर्स को बुलाया, मिलर्स नई नीति के विरोध में अड़े : किसानों की बात सुनकर सचिव ने राइस मिल मालिक प्रधान मांगे राम खुरानियां को बुलाया और खरीद शुरू करने के बारे में जाना। मांगे राम ने बताया कि देश में धान की खरीद एक पालिसी के तहत ही होती है। पंजाब सरकार के द्वारा राइस मिल के माध्यम से खरीद करने के लिये कोई शर्त नही रखी गई, जबकि प्रदेश सरकार ने राइस मिल मालिकों से 5 प्रतिशत बैंक गारंटी मांग रखी है। जिस कारण से राइस मिल मालिकों ने सरकारी खरीद करने से इंकार कर दिया है। किसानों ने कहा कि हमने अपनी धान सरकार को देनी है, न कि राइस मिलों को।
नए नियमों के अनुसार नहीं हो सकती खरीद : हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा का कहना है कि नए नियमों के अनुसार राइस मिलर्स खरीद करने में असमर्थ हैं। इसीलिए पहले दिन खरीद नहीं की गई। उनके पास पूरे प्रदेश में किसी भी मिलर द्वारा खरीद की सूचना नहीं हैं। अधिकारियों के संदेश जरुर आए, लेकिन उन्होंने अपनी असमर्थता जता दी है।
ये हैं मांगें : सरकार ने इस बार नए मिलर्स व लीज पर मिल लेकर मिलिंग करने वाले मिलर्स से 5 प्रतिशत बैंक गारंटी की मांग की हे। मिलर्स इस बैंक गारंटी को वापिस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं मौसम के कारण आई खराबी के कारण धान के दाने में डिसकलर, डैमेज व टुकड़े की समस्या के चलते नियमों में छूट की मांग कर रहे हैं।
ऐसे होती है धान की सरकारी खरीद : सरकार की खरीद एजेंसियां धान की खरीद करती हैं। वे मंडी में ही ढेरी खरीद कर राइस मिल मालिक को दे देती हैं। एजेंसी द्वारा किसान का भुगतान कर दिया जाता है। इसके बाद मिल मालिक द्वारा इसी धान को मंडी से उठवाकर मिल तक ले जाया जाता है। जहां उसमें से चावल निकाल कर प्रति क्विंटल धान के बदले 67 किलो चावल मिलर को सरकार को वापस देना होता है। इस बार मिलर इस नीति के तहत मिलिंग के लिए लगाई गई शर्तों का विरोध कर रहे हैं।
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मार्केट कमेटी सचिव दलेल सिंह ने कहा कि सोमवार को नमी की मात्रा ज्यादा आई हुई थी। एफसीआई द्वारा खरीद का प्रयास किया गया, लेकिन उसमें नमी ज्यादा थी। इसलिए किसानों को फसल सुखाकर लाने का आग्रह किया गया है। हड़ताल को लेकर उनके पास कोई सूचना नहीं हैं।
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