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आखिर क्यों मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर कुंडली मारे बैठे हैं अधिकारी?

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आखिर क्यों मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर कुंडली मारे बैठे हैं अधिकारी?
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-अधर में लटकी पड़ी है मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाओं की फाइलें
-दो प्रोजेक्ट को छोड़ अन्य सभी पर महज कागजी खानापूर्ती
-आखिर कब मिलेगा सीएम की घोषणाओं का जिले को लाभ
नसीब सैनी
कैथल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने करीब साढ़े तीन साल में जिले में अभी तक 155 घोषणाएं की हैं। जिसमें से केवल 37 में काम पूरा हुआ है। इसके अलावा अधिकतर बड़ी घोषणाओं की फाइलें चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय तथा विभिन्न विभागों के मुख्यालयों में अधिकारियों की टेबल पर पड़ी धूल फांक रही है। सीएम की घोषणाओं को लेकर हर माह समीक्षा होती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि चंडीगढ़ या पंचकुला में विभागों के आला अधिकारी क्यों इन फाइलों पर कुंडली मारे बैठे हैं? क्या इनमें कोई भ्रष्टाचार की उम्मीद कर रहा है या फिर जानबूझकर इन फाइलों को दबाया हुआ है। अमर उजाला ने सीएम द्वारा की गई कुछ बड़ी घोषणाओं की जानकारी जुटाई तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि लगभग एक साल या इससे भी अधिक समय से कई बड़ी घोषणाएं चंडीगढ़ या पंचकुला स्तर पर लंबित हैं। एक फाइल तो मुख्यमंत्री कार्यालय में लटकी हुई है।
1. महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय मूंदड़ी:-गांव मूंदड़ी में बनने वाले इस विश्वविद्यालय की घोषणाएं सीएम द्वारा 3 साल पहले की गई थी। फाइल की स्थिति यह है कि 2 मई 2017 से यह फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में ही लंबित है। अब वहां से आगे क्यों नहीं सरक रही? यह जिलास्तरीय अधिकारियों को नहीं पता।
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2. रेलवे ओवर ब्रिज करनाल रोड:-मुख्यमंत्री ने वर्ष 2015 में यह घोषणा की थी। विधानसभा में इस बार इस बारे में प्रस्ताव पारित हुआ। लेकिन दिल्ली स्तर पर 1 सितंबर 2017 के बाद से इस फाइल के बारे में जिलास्तर पर कोई अपडेट नहीं है।
3. सिटी स्कवॉयर कैथल:-कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत इस प्रोजेक्ट को भी सीएम ने करीब 3 साल पहले दोबारा स्वीकृति दे दी थी। जिला प्रशासन की ओर से स्थानीय निकाय विभाग को 12 मई 2017 को फाइल भेजे जाने के बाद से कोई भी अपडेट नही है।
4. कपिलमुनि महिला कॉलेज कलायत:-करीब 2 साल पहले कलायत में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि कलायत के कपिलमुनि महिला कॉलेज को सरकार अपने अधीन लेकर इसे सरकारी दर्जा दे देगी। लेकिन इस बारे में भी अब तक कुछ नही हुआ। इस हिसाब से लगता है कि आने वाले कॉलेज के शिक्षा सत्र में भी इसे सरकारी दर्जा प्राप्त नहीं होगा।
5. नर्सिंग कॉलेज धेरड़:-पूंडरी में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि धेरड़ू में नर्सिंग कॉलेज बनेगा। 7 सितंबर 2017 के बाद से यह फाइल भी चंडीगढ़ में लंबित है।
6. हॉकी अकादमी हाबड़ी:-सीएम की घोषणा के बाद इस योजना के लिए दोबारा से हरियाणा सरकार ने मंजूरी दे दी है। लेकिन 23 अक्टूबर 2017 के बाद से यह फाइल स्पोर्टस विभाग में धूल फांक रही है।
7. शहर से अंबाला रोड पर नए बाईपास तक फोरलेनिंग कार्य:-कैथल शहर से अंबाला रोड पर नए बाईपास तक फोरलेन का काम होना था। इसके लिए फाइल एनएचएआई में 28 दिसंबर 2017 से लंबित है।
8. मॉडर्न पार्क सीवन:-परियोजना 21 दिसंबर 2017 से पंचायत विभाग में आला अधिकारियों के स्तर पर लंबित है। काम नहीं हुआ।
9. गुहला में पटवार भवन:-गुहला में पटवार भवन की फाइल 9 फरवरी 2018 के बाद से लंबित है।
10. तहसीलदार, एसडीएम भवन का निर्माण कार्य गुहला मभी 9 फरवरी 2018 के बाद से लंबित है।
11. चीका में स्टेडियम:-8 फरवरी 2018 को फाइल चंडीगढ़ भेजी गई थी। अभी तक कोई अपडेट नहीं।
सीएम के गोद लिए गांव क्योडक़ में स्थिति:-पिछले एक माह में मुख्यमंत्री के गोद लिए गांव में तेजी आई है। लेकिन लाला लाजपतराय यूनिवर्सिटी को दिया गया 50 लाख रुपये का फंड लोक निर्माण विभाग को नहीं भेजा जा रहा है। जिस कारण इसकी चारदीवारी का काम शुरू नहीं हो पाया है। लेकिन गांव में कोटी-कूट तीर्थ पर लगभग 1 करोड़ रुपये से काम शुरू हो गया है। इसके अलावा इस गांव में सीवरेज की योजना भी चल रही है।
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मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर काम क्यों नहीं कर रहे चंडीगढ़ व पंचकुला में बैठे अधिकारी?:-अब सवाल यह उठता है कि आखिर प्रदेश मुख्यालय पर जहां मुख्यमंत्री का कार्यालय है। उसी कार्यालय के बगल में बैठने वाले अधिकारी मुख्यमंत्री की घोषणाओं की फाइलों पर गौर क्यों नहीं फरमा रहे हैं? यह बात समझ से परे है। मुख्यमंत्री कार्यालय को चाहिए कि इन सभी लंबित फाइलों पर जवाब तलब किया जाए कि आखिर इन फाइलों को क्यों रोका गया है।
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