संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने सदोष मानव वध के एक मामले में दोषी को 10 साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दोषी को पांच महीने के अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
इस बारे में सोहन लाल निवासी जाखौली ने थाना तितरम में 11 अगस्त 2021 को मुकदमा नंबर 174 दर्ज करवाया था। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता सोहन लाल एक अगस्त 2021 को अपनी गार्ड की ड्यूटी पर कैथल आया हुआ था। उसके चचेरे भाई रिंकू ने उसे फोन पर बताया कि तेरे भाई मोनू को सांस लेने में परेशानी हो रही है, उसे सरकारी अस्पताल कैथल में दाखिल किया हुआ है।
इस पर सोहन अस्पताल पहुंचा। वहां रिंकू व परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि मोनू ने सुरेश वासी जाखौली के मीटर का तार खींच दिया था। इससे सुरेश व मोनू की आपस में कहासुनी हो गई थी। सुरेश ने मोनू को डंडा भी मारा है, लेकिन मोनू के शरीर पर चोट दिखाई नहीं दी। फिर सोहन अपनी ड्यूटी पर चला गया।
इसके बाद सोहन के पास उसके चाचा राजेश का फोन आया कि इलाज के दौरान मोनू की मृत्यु हो गई है। सोहन ने शक जताया कि मोनू की मृत्यु सुरेश से हुए झगड़े के कारण हुई है। इस पर पुलिस ने सोहन की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर लिया तथा चालान बनाकर अदालत में पेश कर दिया। मामले में कुल 14 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सबूतों और गवाहों की रोशनी में एडीजे अमित गर्ग ने अपने 28 पन्ने के फैसले में दोषी सुरेश को 10 साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
क्या है सदोष मानव वध
किसी व्यक्ति की मृत्यु का इरादा किए बिना, लेकिन जान-बूझकर ऐसी कोई हरकत करना जिससे मौत हो जाए, उसे सदोष मानव वध कहते हैं। इसे हत्या के बराबर नहीं माना जाता और इसी वजह से सजा कम होती है। गौरतलब है कि यदि कोई व्यक्ति किसी विकार, रोग या शारीरिक दुर्बलता से ग्रस्त व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचाता है और इस वजह से उसकी मौत हो जाती है, तो इसे सदोष मानव वध कहा जाता है। दूसरी ओर हत्या में किसी व्यक्ति की मृत्यु करने का इरादा साफ होता है।