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Kaithal News: 20 में 10 एंबुलेंस पूरी कर चुकीं मियाद

Tue, 12 May 2026 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले में संचालित 20 एंबुलेंसों में से 10 अपनी निर्धारित मियाद पूरी कर चुकी हैं, जबकि 17 एंबुलेंस पांच वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। लगातार खराब हो रही इन गाड़ियों के कारण मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।

स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय को 10 नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा है। जिले में चार सीएचसी, दो उपमंडल अस्पताल, पांच पीएचसी और सात नागरिक अस्पतालों में एंबुलेंस तैनात हैं। सभी गाड़ियां डायल-112 सेवा से जुड़ी हुई हैं और रोजाना औसतन 60 के करीब कॉल प्राप्त होती हैं। इसके बावजूद कई बार मरीजों और उनके परिजनों को एंबुलेंस के इंतजार में परेशानी झेलनी पड़ती है।
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जिले में छह एंबुलेंस वर्ष 2018 मॉडल की हैं, जबकि चार एंबुलेंस वर्ष 2019 मॉडल की हैं। नियमानुसार किसी भी एंबुलेंस को पांच वर्ष या तीन लाख किलोमीटर चलने के बाद सेवा से हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन जिले में अब भी ये गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं। आधे से अधिक एंबुलेंस तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं।

पुरानी एंबुलेंसों के इंजन कमजोर पड़ चुके हैं, जिसके कारण वे तेज गति से नहीं चल पातीं। कई बार रास्ते में गाड़ी बंद होने की घटनाएं भी सामने आती हैं। लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल के कारण इनके पुर्जे घिस चुके हैं और ब्रेकडाउन का खतरा बना रहता है। खराब सस्पेंशन और झटकों के कारण गंभीर मरीजों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।





रखरखाव पर बढ़ रहा खर्च

स्वास्थ्य विभाग को इन पुरानी गाड़ियों के रखरखाव पर भी भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। बार-बार मरम्मत कराने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग लगातार तेज हो रही है।

शहर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि कई बार एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती, जिसके कारण मरीजों को निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के लिए समय पर एंबुलेंस मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन पुरानी गाड़ियों के कारण देरी हो जाती है। वहीं निजी एंबुलेंस संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

ढांड निवासी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जिले की आबादी के अनुसार एंबुलेंसों की संख्या कम है। सरकार को जल्द नई एंबुलेंस उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर राहत मिल सके।
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नई एंबुलेंस की मांग भेजी गई : डॉ. रेनू चावला

सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि मरीजों की सुविधा के लिए सभी एंबुलेंसों की नियमित मरम्मत कर उन्हें संचालन में रखा जा रहा है। यदि किसी एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आती है तो उसे तुरंत ठीक कराया जाता है। उन्होंने कहा कि नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है और इसकी मांग मुख्यालय को भेज दी गई है।
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