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युवा आज संभालेंगे धरने की कमान, खून से लिखेंगे प्रधानमंत्री को पत्र

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खटकड़ टोल पर किसान धरने पर पहुंची महिलाएं। संवाद - फोटो : Jind
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जींद/नरवाना/उचाना। कृषि कानूनों के विरोध में खटकड़ और बद्दोवाल टोल पर किसानों ने धरना वीरवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को युवा किसान दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान धरने की पूरी बागडोर युवाओं के हाथ में रहेगी। साथ ही खटकड़ टोल से युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खून से पत्र लिखेंगे। वहीं बद्दोवाल टोल पर पांच महिलाओं ने क्रमिक अनशन कर कृषि कानूनों के खिलाफ रोष जताया।
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किसान मोर्चा के आह्वान पर 26 फरवरी को खटकड़ टोल पर किसानों के धरने पर युवा दिवस मनाया जाएगा। इस दिन युवा मंच संचालक करेंगे। वक्ता भी धरने पर युवा ही होंगे। इस दौरान राकेश टिकैत की खटकड़ टोल पर आयोजित रैली में व्यवस्था बनाने में भूमिका निभाने वाली टीम में शामिल युवाओं को सम्मानित किया जाएगा।
पीले चावल देकर किसानों को दिया जाएगा आंदोलन में न्योता
किसान नेता आजाद पालवां व बिजेंद्र सिंधु ने बताया कि अब अधिक से अधिक किसानों व खेती से जुड़े अन्य लोगों को आंदोलन में शामिल किया जाएगा। किसान नेता सतबीर पहलवान ने बताया कि जो किसान अब तक आंदोलन से दूर हैं, उन्हें पीले चावल भेजे जाएंगे। सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के अलावा हर धर्म से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। गांव-गांव जाकर टीम बनाकर आंदोलन में शामिल होने के लिए पीले चावल देकर न्योता दिया जाएगा। अब रोटेशन प्रणाली के तहत किसान दिल्ली बॉर्डर व धरनों पर आएंगे। गौरतलब है कि हरियाणा में शुभ कार्यों पर रिश्तेदारों व जानकारों को पीले चावल भेज कर निमंत्रण देने की प्रथा रही है।
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बद्दोवाल टोल से 28 को निकाली जाएगी महिलाओं की स्कूटी रैली
नरवाना। बद्दोवाला टोल प्लाजा पर चल रहे धरने से नरवाना शहर तक 28 फरवरी को स्कूटी रैली निकाली जाएगी। इसका नेतृत्व महिलाएं ही करेंगी। वीरवार को महिला नन्ही, ओमपति, ओमी, बाली व भतेरी ने क्रमिक अनशन किया। वीरवार को धरने में जाजनवाला, दनोदा कलां, दनोदा खुर्द, फुलियां कलां, फुलियां खुर्द, कान्हा खेड़ा, भाना ब्राह्मण, गुरुसर, अंबसर व बेलरखां गांव के किसानों ने हिस्सा लिया। सुनील बदोवाल व मा. बलवीर सिंह ने बताया कि 26 फरवरी को युवा किसान एकता दिवस मनाया जाएगा। 27 फरवरी को रविदास जयंती मनाई जाएगी।
किसान नेता मास्टर बलबीर सिंह ने कहा कि पहला कृषि कानून एमपीएससी को खत्म करने और कृषि उपज के पूरे व्यापार को घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट को सौंपने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसानों की फसल व नस्ल दोनों को नष्ट कर देगा। दूसरे कानून के बारे में उन्होंने कहा कि देश भर में अनुबंध खेती को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। विवाद की स्थिति में किसानों को अदालतों में जाने का प्रावधान भी इस कानून में नहीं है। इसलिए किसानों के साथ इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है। तीसरा कानून आवश्यक वस्तु अधिनियम में किया गया एक विनाशकारी संशोधन है।
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